फीफा वर्ल्ड कप 2026 का शुभारंभ 11 जून को हो चुका है। इस दौरान भारतीय मूल के फुटबॉलर सरप्रीत सिंह ने न्यूजीलैंड की टीम के लिए खेलते हुए इतिहास रच दिया है। वे फीफा वर्ल्ड कप में खेलने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी बन गए हैं।16 जून को ईरान के खिलाफ मैच में न्यूजीलैंड ने सरप्रीत सिंह को शुरुआती इलेवन में शामिल किया। मिडफील्डर की भूमिका निभाते हुए उन्होंने 90 मिनट तक मैदान पर खेल दिखाया। 10 नंबर की जर्सी पहनने वाले सिंह ने ईरान के गोल पर तीन शॉट लगाए, हालांकि वे गोल नहीं कर पाए। मैच के 90वें मिनट में उन्हें रिप्लेस किया गया।
सरप्रीत सिंह का बैकग्राउंडसरप्रीत सिंह का जन्म 1999 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में हुआ था। वे इस समय 27 वर्ष के हैं। उनकी फैमिली पंजाब के जालंधर से संबंध रखती है। उनके माता-पिता भारत से न्यूजीलैंड गए और ऑकलैंड में किराने की दुकान चलाते हैं। फुटबॉल के प्रति लगन के कारण उन्होंने सात साल की उम्र में ही ऑकलैंड की विन्स विंटन रूफर सॉकर एकेडमी में प्रवेश लिया। 2015 में वे वेलिंगटन फीनिक्स एकेडमी में शामिल हुए। उन्होंने न्यूजीलैंड की अंडर-17 ओशिनिया कप और अंडर-20 वर्ल्ड कप टीमों का प्रतिनिधित्व किया है। 2020 में उन्होंने एफसी नर्नबर्ग के साथ लोन डील साइन की थी।
वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक उपस्थिति
फुटबॉल इतिहास में यह पहली बार माना जा रहा है जब भारतीय मूल का कोई खिलाड़ी फीफा वर्ल्ड कप के मुख्य मंच पर उतरकर अपनी राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रहा है। भारत अब तक फीफा वर्ल्ड कप में सीमित उपस्थिति वाला देश रहा है और भारतीय मूल के खिलाड़ियों की भागीदारी भी बेहद कम रही है।
ऐसे में सरप्रीत सिंह का विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर पहुंचना एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारतीय मूल के युवा खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर पर फुटबॉल में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।
बचपन से ही था फुटबॉल का जुनून
सरप्रीत सिंह का जन्म 1999 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में हुआ। बचपन से ही उन्हें फुटबॉल में गहरी रुचि थी। केवल सात वर्ष की उम्र में उन्होंने ऑकलैंड की विन्स विंटन रूफर सॉकर एकेडमी में प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था।
कम उम्र में ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी थी। नियमित अभ्यास, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें तेजी से आगे बढ़ने में मदद की। युवा स्तर पर उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में प्रभावशाली प्रदर्शन किया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सरप्रीत सिंह की भागीदारी ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। अब फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें उनके आगामी मुकाबलों और प्रदर्शन पर टिकी हैं। यदि वे इसी तरह का खेल जारी रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में न्यूजीलैंड फुटबॉल और वैश्विक फुटबॉल जगत में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारतीय मूल के इस खिलाड़ी ने विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय बनी रहेगी।
