मध्य प्रदेश राज्य सेवा की अधिकारी और सिंगरौली नगर पालिक निगम की आयुक्त सविता प्रधान ने संवेदनशीलता और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। उन्होंने कैंसर से जूझ रही मासूम बच्ची के चेहरे पर मुस्कान लाने और उसका आत्मविश्वास लौटाने के लिए अपना मुंडन करा लिया।दरअसल आयुक्त सविता प्रधान की मुलाकात कैंसर पीड़ित बच्ची से हुई। बच्ची उनसे बातचीत में भावुक हो गई और बताया कि कीमोथेरेपी के कारण सिर के बाल झड़ गए हैं। इस कारण वह खुद को दूसरों से अलग और असहज महसूस करती है।बच्ची की पीड़ा को समझते हुए आयुक्त ने उससे पूछा कि अगर मैं भी तुम्हारी तरह दिखूं तो क्या तुम्हें खुशी होगी। बच्ची ने मुस्कुराते हुए सहमति जताई, तो सविता प्रधान ने बिना किसी औपचारिकता के अपना मुंडन करा लिया। आयुक्त के इस कदम ने न केवल बच्ची के चेहरे पर मुस्कान लौटाई बल्कि समाज को भी मानवता, संवेदनशीलता और सहानुभूति का संदेश दिया।
कीमोथेरेपी के कारण झड़ गए थे बच्ची के बाल
जानकारी के अनुसार, सिंगरौली नगर पालिक निगम की आयुक्त सविता प्रधान की मुलाकात कैंसर से पीड़ित एक बच्ची से हुई। बातचीत के दौरान बच्ची ने अपनी बीमारी और इलाज के बारे में बताया। उसने भावुक होकर कहा कि कीमोथेरेपी के चलते उसके सिर के सभी बाल झड़ गए हैं। इस वजह से वह खुद को दूसरे बच्चों से अलग महसूस करती है और लोगों के बीच जाने में संकोच करती है।
कैंसर के इलाज के दौरान बाल झड़ना एक सामान्य चिकित्सीय प्रक्रिया है, लेकिन बच्चों के लिए यह मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में परिवार और समाज से मिलने वाला भावनात्मक सहयोग उनके आत्मविश्वास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समाज को दिया सहानुभूति का संदेश
सविता प्रधान का यह कदम केवल एक बच्ची तक सीमित नहीं है। यह समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों, विशेषकर बच्चों, के प्रति संवेदनशील और सहयोगी रवैया अपनाना चाहिए।
कई बार बीमारी से अधिक उसका मानसिक प्रभाव व्यक्ति को परेशान करता है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से गुजर रहे बच्चों के लिए परिवार, डॉक्टर, मित्रों और समाज का भावनात्मक समर्थन उनके उपचार के दौरान नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करता है। ऐसे सकारात्मक व्यवहार से मरीजों में अकेलेपन की भावना कम होती है और वे स्वयं को सामान्य जीवन के अधिक करीब महसूस करते हैं।
यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि छोटे-छोटे मानवीय प्रयास किसी के जीवन में उम्मीद की नई किरण बन सकते हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे बच्चों के लिए प्रेम, अपनापन और भावनात्मक सहयोग किसी दवा से कम नहीं होता। सविता प्रधान की यह संवेदनशील पहल आने वाले समय में भी मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की एक प्रेरक मिसाल के रूप में याद की जाएगी।
