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समाचार मिर्ची

इस साल सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से लेकर 28 अगस्त तक रहने वाला है। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। ज्योतिषविद प्रवीण मिश्र के अनुसार इस महीने कुछ नियमों का पालन और कुछ बातों से परहेज करने पर महादेव की कृपा बनी रहती है।

यहां यह जानकारी दे दें कि, सावन में रोजाना भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। संभव हो तो जल में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं और कम से कम एक बेलपत्र अर्पित करें। एक बार मिट्टी से बने पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक अवश्य कराएं। प्रत्येक सोमवार रुद्राभिषेक करें और गरीबों को भोजन या फल का दान दें। इस दिन व्रत रखें तथा भगवान को कच्चा दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें। प्रतिदिन शिव पुराण का पाठ करें। दूध, चावल, चीनी, आटा जैसी सफेद वस्तुओं का दान करें। खीर का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें। तांबे का लोटा, जल पात्र, मिट्टी या पीतल का घड़ा तथा पूजा सामग्री मंदिर में दान करें। रुद्राक्ष की माला से ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। आर्थिक दान संभव न हो तो मंदिर की सफाई जैसे श्रमदान करें।

सावन में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन न करें। सात्विक भोजन ग्रहण करें तथा विशेष रूप से बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। गाली-गलौच, क्रोध और कटु भाषा से बचें। मधुर और सकारात्मक व्यवहार रखें। परिवार में लड़ाई-झगड़ा, कलह और तनाव से बचें तथा घर का वातावरण शांत रखें।भगवान शिव को केतकी और केवड़ा का फूल न चढ़ाएं। उन्हें तुलसी, सिंदूर, कुमकुम, हल्दी और शंख से जल बिल्कुल न अर्पित करें। सावन में श्रद्धा, नियम और पवित्रता के साथ आराधना करें। दिखावे से अधिक भाव और समर्पण को महत्व दें।

सावन का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस महीने श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि सावन में किए गए जप, तप, दान और व्रत का विशेष पुण्य फल मिलता है।

यही कारण है कि इस दौरान लाखों श्रद्धालु शिव मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं और कई लोग पूरे महीने या प्रत्येक सोमवार का व्रत भी रखते हैं।

सावन सोमवार का विशेष महत्व

सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान शिव को—

  • कच्चा दूध
  • बेलपत्र
  • भांग
  • धतूरा
  • आक के फूल

अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा शुभ फल प्रदान करती है।

इस संबंध में धार्मिक विद्वानों का मानना है कि सावन में पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार श्रद्धा, नियम और समर्पण है। केवल बाहरी आडंबर या दिखावे की बजाय सच्चे मन से भगवान शिव का स्मरण, सेवा, संयम और सदाचार को अधिक महत्व दिया गया है।यदि श्रद्धालु पूरे मन से पूजा, जप, दान और सेवा का पालन करते हैं, तो सावन का महीना आध्यात्मिक शांति और आत्मिक संतोष का माध्यम बन सकता है। हालांकि, पूजा-पद्धतियों और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते समय स्थानीय परंपराओं तथा अपने परिवार के धार्मिक रीति-रिवाजों का सम्मान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

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