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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। दिग्गज अभिनेता पंकज कपूर ने हाल ही में शाहरुख खान से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में अपने छात्र दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान उस समय समोसे सप्लाई करते थे।

पंकज कपूर ने किंडल कास्ट के यूट्यूब चैनल पर अपने पुराने क्लासमेट्स के साथ हुई मुलाकात के दौरान यह बात कही। उन्होंने बताया कि एनएसडी से ग्रेजुएशन हुए उन्हें 50 साल हो गए थे और घर पर गेट-टुगेदर रखा गया था। इस दौरान इब्राहिम अल्काजी द्वारा निर्देशित नाटकों की यादें ताजा हुईं। अल्काजी एक साथ ‘रजिया सुल्तान’, ‘तुगलक’ और ‘अंधा युग’ जैसे तीन बड़े नाटक पुराने किले में मंचित कर रहे थे।

‘रजिया सुल्तान’ के एक सीन में भूखे नागरिकों की भीड़ थी। पंकज और उनके दोस्त भीड़ में शामिल थे जबकि दो क्लासमेट्स सैनिकों की भूमिका निभा रहे थे। सैनिकों को नान फेंकने थे। छात्रों ने चालाकी से योजना बनाई कि वे नान पकड़कर इंटरवल में समोसे खरीदकर बैकस्टेज ले जाते और नान, समोसा व चाय का मजा लेते।पंकज कपूर के अनुसार, यह प्लान ज्यादा देर छिपा नहीं रह सका और अल्काजी ने उन्हें डांटा। उन्होंने खुलासा किया कि समोसे सप्लाई करने वाले 10 साल के शाहरुख खान थे, जिनके पिता एनएसडी में कैंटीन चलाते थे। शाहरुख खान ने भी 2016 में एक इंटरव्यू में पुष्टि की थी कि उनके पिता एनएसडी कैंटीन चलाते थे, जिस वजह से वे कई बेहतरीन एक्टर्स को जान पाए।

एनएसडी के 50 साल पूरे होने पर हुई पुरानी यादें ताजा

पंकज कपूर ने बताया कि उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से ग्रेजुएशन किए 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर उन्होंने अपने घर पर पुराने साथियों के लिए एक गेट-टुगेदर आयोजित किया था। मुलाकात के दौरान सभी कलाकारों ने अपने छात्र जीवन, थिएटर और मंचन से जुड़ी कई यादें साझा कीं।

इसी बातचीत के दौरान मशहूर रंगकर्मी और निर्देशक इब्राहिम अल्काजी के निर्देशन में हुए ऐतिहासिक नाटकों का भी जिक्र हुआ। पंकज कपूर ने बताया कि उस समय अल्काजी दिल्ली के पुराने किले में एक साथ ‘रजिया सुल्तान’, ‘तुगलक’ और ‘अंधा युग’ जैसे तीन बड़े नाटकों का मंचन कर रहे थे। इन प्रस्तुतियों में बड़ी संख्या में कलाकार और छात्र हिस्सा लेते थे।

समोसे पहुंचाते थे शाहरुख खान

पंकज कपूर ने इसी किस्से को आगे बढ़ाते हुए बताया कि इंटरवल के समय जिन समोसों का इंतजार रहता था, उन्हें पहुंचाने का काम उस समय युवा शाहरुख खान किया करते थे। उस दौर में शाहरुख रंगमंच से जुड़े हुए थे और थिएटर की गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते थे।

पंकज कपूर ने इस प्रसंग को बेहद सहज और हास्यपूर्ण अंदाज में साझा किया। उन्होंने बताया कि थिएटर की दुनिया में सभी लोग एक-दूसरे की मदद करते थे और कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं माना जाता था। यही सहयोग और सीख आगे चलकर कलाकारों के व्यक्तित्व को मजबूत बनाती थी।

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