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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली देशभर के कृषि क्षेत्र से जुड़े छात्रों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बड़ी खबर सामने आई है। एग्रीकल्चर की पढ़ाई और रिसर्च कर रहे छात्रों को अब अपनी स्कॉलरशिप या फेलोशिप के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा कैंपस से एनएसपी-डीबीटी सिस्टम की औपचारिक शुरुआत कर दी है।

इस आधुनिक सुविधा के तहत सरकार ने सीधे 21.35 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है। इस नई डिजिटल पहल के तहत देशभर के 6000 से अधिक एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स को सीधा आर्थिक फायदा मिलने जा रहा है। नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जुड़ जाने से पूरा सिस्टम पूरी तरह ऑटोमेटेड हो गया है। अब स्कॉलरशिप का पैसा बीच के किसी भी झंझट के बिना सीधे छात्रों के बैंक खातों में क्रेडिट होगा। सरकार ने तय किया है कि यह आर्थिक सहायता हर महीने छात्रों के खातों में भेजी जाएगी।पहले छात्रों की शिकायत रहती थी कि फेलोशिप का पैसा महीनों अटक जाता था, जिससे उनके रोजमर्रा के खर्च और रिसर्च के काम प्रभावित होते थे। अब पूरा सिस्टम ऑनलाइन और ऑटोमेटेड होने से बिचौलियों और कागजी लेटलतीफी खत्म हो जाएगी। रिसर्च स्कॉलर्स और पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए समय पर फेलोशिप मिलना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि उनका काम लैब एक्सपेरिमेंट्स और फील्ड ट्रायल्स पर टिका रहता है।

इस मौके पर कृषि मंत्री ने कहा कि एग्रीकल्चर की पढ़ाई सिर्फ बंद कमरों और किताबों तक सीमित नहीं रह सकती। छात्रों को असल खेती की जमीनी हकीकत, मिट्टी की दशा और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए खेतों में उतरना होगा। छात्रों को फील्ड का व्यावहारिक अनुभव और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। कृषि मंत्री ने छात्रों से आईसीएआर के संस्थानों में हरियाली अमावस्या के मौके पर पौधारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील भी की है।

क्या है NSP-DBT सिस्टम?

NSP यानी National Scholarship Portal और DBT यानी Direct Benefit Transfer को जोड़ने का उद्देश्य छात्रवृत्ति एवं फेलोशिप भुगतान की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना है। इस डिजिटल सिस्टम के जरिए पात्र छात्रों की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों तक पहुंचाई जाएगी।

पहले छात्रवृत्ति या फेलोशिप के भुगतान की प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर दस्तावेजों की जांच, स्वीकृति और भुगतान से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थीं। इससे कभी-कभी भुगतान में देरी हो जाती थी। नई व्यवस्था में प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और स्वचालित बनाने की कोशिश की गई है।

सरकार के अनुसार, इस पहल से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को अपनी आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम होगी।

आने वाले समय में यदि डिजिटल भुगतान व्यवस्था सुचारू रूप से चलती है, तो इससे छात्रों को समय पर सहायता मिलने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता में भी सुधार हो सकता है। वहीं कृषि शिक्षा को फील्ड ट्रेनिंग से जोड़ने पर जोर छात्रों को किताबों के ज्ञान के साथ वास्तविक खेती की परिस्थितियों को समझने का अवसर देगा।

कुल मिलाकर, NSP-DBT सिस्टम की शुरुआत कृषि शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े छात्रों के लिए आर्थिक सहायता को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश है। सीधे बैंक खाते में भुगतान, डिजिटल प्रक्रिया और व्यावहारिक कृषि प्रशिक्षण पर जोर के जरिए सरकार ने कृषि क्षेत्र में पढ़ने वाले युवाओं को शिक्षा, शोध और जमीनी अनुभव से जोड़ने की दिशा में एक साथ कई पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया है।

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