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ढाका। बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न 13वें संसदीय चुनावों ने देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी बहुमत हासिल करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जिसके बाद तारिक रहमान की अगुवाई में नई सरकार का गठन हो रहा है। चुनाव आयोग ने निर्वाचित सांसदों की आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी कर दी है, और अब कैबिनेट में हिंदू नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय को शामिल करने की मजबूत संभावना जताई जा रही है। यह खबर बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का संकेत देती है।

जानकारी के अनुसार, 13 फरवरी 2026 को हुए चुनावों में बीएनपी ने 212 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 77 सीटें मिलीं। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद पहला बड़ा लोकतांत्रिक प्रयोग था। चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए, और मतदान प्रतिशत भी उल्लेखनीय रहा। बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं।

इस संबंध में जानकारी दे दें कि, गोयेश्वर चंद्र रॉय बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं। उनका जन्म 1 नवंबर 1951 को ढाका जिले के केरानीगंज में एक बंगाली हिंदू परिवार में हुआ था। वे 1978 से ही बीएनपी से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य हैं, जो बीएनपी का सर्वोच्च नीति-निर्माण निकाय है। 1990 के दशक में उन्होंने खालिदा जिया सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे खुद को “धरती का बेटा” बताते हैं और जोर देकर कहते हैं कि बांग्लादेश में हिंदू या अन्य अल्पसंख्यक अलग नहीं हैं, बल्कि सभी नागरिक समान अधिकारों वाले हैं।

बीएनपी की इस जीत के बाद अल्पसंख्यक समुदायों में सकारात्मक संदेश गया है। गोयेश्वर रॉय जैसे नेता का कैबिनेट में शामिल होना न केवल हिंदू समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत होगा, बल्कि देश में धार्मिक सहिष्णुता और समानता को बढ़ावा देगा। जिया परिवार से उनके गहरे संबंध हैं, और वे तारिक रहमान के करीबी माने जाते हैं। नई सरकार में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर अल्पसंख्यक कल्याण, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में।

चलते चलते बताते चले कि, यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण है, जहां अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक होता है। गोयेश्वर चंद्र रॉय की संभावित मंत्री पद की नियुक्ति बांग्लादेश में समावेशी शासन की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।

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