पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने दावा किया कि सरकार का खजाना खाली है और वित्तीय स्थिति दयनीय हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पेंशन और वेतन के भुगतान तक के लिए आपातकालीन फंड का सहारा लेना पड़ रहा है। कैग रिपोर्ट और बजटीय आंकड़ों के अनुसार बिहार की कमाई सीमित है और ज्यादातर राजस्व केंद्र की मदद पर निर्भर है। राज्य का राजस्व उसकी जीडीपी का सिर्फ 7 प्रतिशत है, फिर भी बिहार अपनी जीडीपी का 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करता है।
जानकारी दे दें कि, बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3,47,589.76 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक बजट का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, पुराने कर्जों पर ब्याज, योजनाओं और प्रशासनिक लागत में चला गया। 2025 के बिधानसभा चुनावों के दौरान एनडीए ने मुफ्त बिजली, महिलाओं को आर्थिक मदद, पेंशन में बढ़ोतरी, एक करोड़ रोजगार, गरीब परिवारों के लिए नई योजनाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश जैसे वादे किए। मान लें कि सरकार के पास 100 रुपये हैं तो लगभग 21.78 रुपये राज्य खुद कमाता है, 45.49 रुपये केंद्रीय टैक्सों में राज्य के हिस्से के रूप में मिलते हैं, 14.92 रुपये केंद्र की सब्सिडी से और 17.81 रुपये लोन से आते हैं। खर्चों में लगभग 41.55 रुपये सामाजिक योजनाओं, 28.12 रुपये सामान्य सेवाओं और 23.39 रुपये आर्थिक सेवाओं में जाते हैं।
कर्ज का बोझ और राजस्व स्रोत
कैग रिपोर्ट के अनुसार राज्य की आबादी के हिसाब से बिहार में प्रति व्यक्ति कर्ज का बोझ लगभग 28,000 रुपये है। 2024-25 वित्तीय वर्ष में बिहार पर कुल कर्ज लगभग 3.74 लाख करोड़ रुपये था। 2026-27 के लिए सरकार ने 72,901 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने का प्रावधान किया है। ग्रीन टाउनशिप प्रोजेक्ट्स के लिए एचयूडीसीओ के साथ एक लाख करोड़ रुपये तक की फंडिंग का समझौता भी किया गया है। यह राज्य के ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट का लगभग 39 प्रतिशत है।
सरकारी अनुमानों के अनुसार 2026-27 में बिहार कुल 2,85,277.12 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करेगा। इसमें राज्य का अपना राजस्व 75,202.99 करोड़ रुपये, केंद्र से करों का हिस्सा 1,58,178.32 करोड़ रुपये और अनुदान 51,895.81 करोड़ रुपये शामिल हैं। राज्य कुल राजस्व का केवल एक-तिहाई हिस्सा ही खुद जुटा पाएगा। राज्य की लगभग 33.70 प्रतिशत आबादी बहुआयामी गरीबी की श्रेणी में आती है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रोजगार में योगदान सिर्फ छह प्रतिशत के आसपास है, जबकि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में इससे लगभग तीन गुना ज्यादा लोग काम करते हैं। सर्विस सेक्टर का योगदान भी राष्ट्रीय औसत से कम है, जिसके कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं।
3.47 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट
बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3,47,589.76 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। इतनी बड़ी बजट राशि राज्य में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत ढांचे पर खर्च की योजनाओं को दर्शाती है। लेकिन किसी भी राज्य की वित्तीय स्थिति को केवल बजट के आकार से नहीं समझा जा सकता। यह देखना भी जरूरी होता है कि सरकार की अपनी आमदनी कितनी है और कुल खर्च को पूरा करने के लिए उसे केंद्र से कितनी राशि तथा कितना कर्ज लेना पड़ता है।
बिहार के मामले में यही अंतर आर्थिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। राज्य की अपनी राजस्व आय सीमित रहने के कारण सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए बाहरी संसाधनों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
