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समाचार मिर्ची

मुंबई। बीएमसी चुनाव के परिणामों के बाद मुंबई की राजनीति में हलचल मची हुई है। देश की सबसे बड़ी और सबसे अमीर नगर पालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद को लेकर अब गहन चर्चा और दांव-पेंच शुरू हो गए हैं। 227 सदस्यीय सदन में मेयर चुनने के लिए बहुमत का आंकड़ा 114 वोटों का है। हालिया चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, लेकिन उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया है कि विपक्ष महज 6 सीटों की दूरी पर है और खेल अभी बाकी है।

बता दें कि, यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। लगभग तीन दशकों से ठाकरे परिवार का BMC पर दबदबा रहा है, लेकिन 2026 के चुनावों में बीजेपी ने इतिहास रचते हुए इस वर्चस्व को तोड़ दिया। बीजेपी ने मुंबई के विभिन्न इलाकों में मजबूत प्रदर्शन किया, खासकर उन वार्डों में जहां विकास, बुनियादी ढांचा और सुशासन के मुद्दे प्रमुख थे। महायुति गठबंधन ने चुनाव प्रचार में महिलाओं के लिए BEST बसों में 50 प्रतिशत छूट, संपत्ति कर में राहत और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर जोर दिया, जिसका असर मतदाताओं पर पड़ा।

परिणाम घोषित होने के बाद से मेयर पद की रेस में नई बहस छिड़ गई है। महायुति के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद, उद्धव गुट ने आक्रामक रुख अपनाया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा किया कि विपक्षी गठबंधन (शिवसेना यूबीटी, एमएनएस, कांग्रेस और अन्य सहयोगी) के पास फिलहाल 108 पार्षद हैं, जो बहुमत से महज 6 सीटें कम है। राउत ने कहा, “हमारे पास सिर्फ 6 सीटें कम हैं, इंतजार करिए। खेल अभी बाकी है।

कुल मिलाकर, BMC में मेयर चुनाव को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। महायुति के पास संख्याबल है, लेकिन उद्धव टीम का “6 सीटें कम” वाला दावा राजनीतिक ड्रामा को जीवंत रख रहा है। मेयर का चुनाव विशेष बैठक में होगा, जहां गुप्त मतदान से फैसला होगा। मुंबई की नजर इस नाटकीय मोड़ पर टिकी है कि क्या विपक्ष कोई चमत्कार कर पाएगा या महायुति आसानी से कुर्सी पर काबिज हो जाएगी।

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