नई दिल्ली। ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इसमें कम पानी की जरूरत पड़ती है और बाजार में फल की अच्छी मांग रहती है। अच्छी पैदावार के लिए पौधे लगाने का समय महत्वपूर्ण होता है। गर्म और नम मौसम ड्रैगन फ्रूट के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसलिए मानसून की शुरुआत में पौधे लगाना सही रहता है। जून से अगस्त तक पौधे लगाने पर मिट्टी में नमी बनी रहती है। खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए क्योंकि ज्यादा पानी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। पौधे लगाने से पहले पानी निकासी की व्यवस्था जरूर कर लें।
जून से अगस्त का समय ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होता है। मानसून के दौरान मिट्टी में नमी रहने से पौधों को शुरुआती लाभ मिलता है। नई कटिंग लगाने वाले किसानों के लिए यह समय आसान रहता है। पौधे लगाने से पहले खेत की अच्छी तैयारी और पानी निकासी की व्यवस्था जरूरी है। जड़ें ज्यादा देर तक पानी में रहने को सहन नहीं कर पातीं। भारी मिट्टी में पानी निकलने का इंतजाम करना आवश्यक है। भुरभुरी और अच्छी निकासी वाली मिट्टी में जड़ें तेजी से फैलती हैं। सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
गर्म मौसम में ड्रैगन फ्रूट का पौधा अच्छी तरह बढ़ता है। करीब 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसकी बढ़वार के लिए सही माना जाता है। पौधा ज्यादा तापमान भी सह सकता है लेकिन लगातार तेज गर्मी में शाखाओं पर सनबर्न का असर दिख सकता है जिससे बढ़वार और फूल आने पर असर पड़ सकता है। बारिश जरूरी है लेकिन जरूरत से ज्यादा बारिश नुकसान पहुंचा सकती है। पानी जमा होने पर जड़ सड़ने और फंगल का खतरा बढ़ जाता है। मानसून में नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी निकाल दें। गर्मी में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। ड्रिप सिंचाई का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
पौधे लगाने के बाद तुरंत फल नहीं मिलते। स्वस्थ और अच्छी कटिंग से तैयार पौधे जल्दी फल देना शुरू कर सकते हैं। आमतौर पर गर्मियों के बाद फूल आने का दौर शुरू होता है और कई जगह सितंबर या अक्टूबर तक फूल दिखाई दे सकते हैं। फूल रात में खिलते हैं। फूल आने के बाद फल को तैयार होने में करीब 30 से 40 दिन लग सकते हैं। मौसम सही रहने पर एक ही पौधे से कई बार फूल और फल मिल सकते हैं। अच्छी पैदावार के लिए समय पर खाद, सिंचाई और शाखाओं की छंटाई जरूरी है। गैर जरूरी शाखाओं को हटा देना सही रहता है।
खेत की तैयारी पौधे लगाने से पहले पूरी कर लें। पौधों को सहारा देने के लिए मजबूत सीमेंट के पोल लगाए जाते हैं। इनके आसपास कटिंग लगाई जाती है। जैसे-जैसे पौधा बढ़ता है शाखाएं पोल के सहारे ऊपर जाती हैं और ऊपर फैलने लगती हैं। बाद में इसी हिस्से से फूल और फल निकलते हैं। पौधों के बीच उचित दूरी रखना जरूरी है ताकि हवा का प्रवाह बना रहे और नमी ज्यादा देर तक न बनी रहे। इससे रोगों का खतरा कम होता है। केमिकल खाद की बजाय ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करें।
