समाचार मिर्ची

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तेहरान। ईरान में आर्थिक संकट के कारण शुरू हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन अब पांचवें दिन में प्रवेश कर चुके हैं और स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों द्वारा लाइव फायरिंग की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें कम से कम तीन से सात प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसक दमन जारी रहा तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा।

वही, प्रदर्शन तेजी से फैल गए और अब 17 से अधिक प्रांतों में पहुंच चुके हैं। छात्रों ने तेहरान, इस्फहान, यज़्द, ज़ंजान और अन्य विश्वविद्यालयों में रैलियां निकालीं। नारे “तानाशाह मुर्दाबाद”, “खामेनेई मुर्दाबाद”, “इस साल सैयद अली को उखाड़ फेंकेंगे” और “न गाजा, न लेबनान, ईरान के लिए अपनी जान” जैसे राजनीतिक हो गए। ये नारे ईरान की विदेश नीति, खासकर फिलिस्तीन और लेबनान के समर्थन पर सवाल उठाते हैं, जो देश के संसाधनों को खोखला कर रहे हैं।

हम आपको बताते चले कि, हिंसा का स्तर तेजी से बढ़ा है। 31 दिसंबर 2025 को इस्फहान प्रांत के फूलादशहर (फुलादशहर) में 37 वर्षीय प्रदर्शनकारी दारियुश अंसारी बख्तियारीवंद को सुरक्षा बलों ने कलाश्निकोव राइफल से गोली मारकर मार डाला। वे प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे थे और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। उसी दिन लोरिस्तान प्रांत के कुहदश्त में 21-22 वर्षीय अमीरहेसम खोदायारीफार्द (या अमीर-हेसम खोदायारी फार्द) को सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मानवाधिकार संगठन हेंगाव के अनुसार, वे प्रदर्शनकारियों के बीच थे, लेकिन सरकारी मीडिया ने उन्हें बसिज (पैरामिलिट्री) सदस्य बताकर दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की हिंसा से उनकी मौत हुई।

जानकारी दे दें कि, रानी सुरक्षा बलों, जिसमें रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और बसिज शामिल हैं, ने टियर गैस, लाइव फायर और गिरफ्तारियां तेज कर दी हैं। तेहरान में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें ब्लॉक कीं, वाहन जलाईं और सरकारी इमारतों पर हमले किए। कुहदश्त और लोरडेगन में सुरक्षा बलों को भगाया गया। क़ुम जैसे पवित्र शहर में भी विरोध हुआ, जो शासन के लिए बड़ा झटका है।

बता दें कि,ये प्रदर्शन ईरान की अर्थव्यवस्था, राजनीति और विदेश नीति पर गहरा असर डाल सकते हैं। यदि हिंसा बढ़ी तो अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ सकती है, जो मध्य पूर्व में नया संकट पैदा कर सकता है। ईरानी लोग अब सिर्फ आर्थिक राहत नहीं, बल्कि आजादी और बदलाव की मांग कर रहे हैं। स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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