नई दिल्ली। मंगलवार को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह एक वलयाकार (अनुलर) सूर्य ग्रहण है, जिसे दुनिया भर में ‘रिंग ऑफ फायर’ या ‘अग्नि वलय’ के नाम से प्रसिद्ध किया जाता है। यह खगोलीय घटना बेहद दुर्लभ और मनोरम होती है, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता, बल्कि सूर्य के चारों ओर एक चमकदार अग्निमय अंगूठी जैसा सुंदर दृश्य बनता है। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा। इसका मुख्य पथ दक्षिणी गोलार्ध में, खासकर अंटार्कटिका महाद्वीप और आसपास के क्षेत्रों से गुजरता है। भारतीय समयानुसार (IST) ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगी और समापन शाम 7 बजकर 57 मिनट पर होगा। इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 31 मिनट रहेगी।
सूर्य ग्रहण क्या है और ‘रिंग ऑफ फायर’ क्यों खास?
सूर्य ग्रहण तब घटित होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो जाती है। इस बार यह अनुलर प्रकार का ग्रहण है, क्योंकि चंद्रमा अपनी कक्षा में अपोगी (पृथ्वी से सबसे दूर) के निकट है। इसलिए चंद्रमा का आकार सूर्य से थोड़ा छोटा दिखता है। नतीजतन, चंद्रमा सूर्य के केंद्र भाग को ढक लेता है, लेकिन किनारों पर सूर्य की रोशनी एक चमकदार वलय (रिंग) के रूप में बनी रहती है, जो ‘रिंग ऑफ फायर’ कहलाती है।इस ग्रहण में ‘रिंग ऑफ फायर’ का नजारा अधिकतम 2 मिनट 20 सेकंड तक रहेगा। अधिकतम ग्रहण (ग्रेटेस्ट एक्लिप्स) UTC समयानुसार दोपहर 12:13 बजे होगा, जो भारतीय समय में शाम लगभग 5:43 बजे के आसपास पड़ता है। इस दौरान सूर्य का लगभग 96.3% हिस्सा ढका जाएगा, जिससे आकाश में एक आग की अंगूठी जैसा आकर्षक दृश्य बनेगा।
भारत में समय और प्रमुख टाइमिंग
भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार ग्रहण की प्रमुख अवस्थाएं इस प्रकार हैं:
- ग्रहण आरंभ (पेनम्ब्रल/पार्शियल फेज शुरू): दोपहर 3:26 बजे
- अनुलर फेज आरंभ (रिंग ऑफ फायर शुरू): शाम लगभग 5:12 बजे (कुछ स्रोतों में 5:13 बजे)
- अधिकतम ग्रहण (पीक/ग्रेटेस्ट एक्लिप्स): शाम 5:42-5:43 बजे के आसपास
- अनुलर फेज समाप्त: शाम 6:11 बजे तक
- ग्रहण पूर्ण समाप्त: शाम 7:57 बजे (कुछ रिपोर्ट्स में 7:58 बजे तक)
यह जानकारी देते चले कि, हिंदू ज्योतिष और पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होता। ज्योतिषाचार्यों का स्पष्ट मत है कि जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए मंदिरों में पूजा-पाठ, विवाह, मुंडन जैसे शुभ कार्य सामान्य रूप से हो सकते हैं। फिर भी, सतर्क लोग ग्रहण काल (3:26 PM से 7:57 PM) में भोजन, पूजा या महत्वपूर्ण कार्य टाल सकते हैं।
