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मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर से करवट लेती नजर आ रही है। लंबे समय से आपसी मतभेदों और बयानबाजी में उलझे पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ और दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर से दोस्ती का हाथ थाम लिया है। यह समीकरण न केवल प्रदेश कांग्रेस की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है, बल्कि कांग्रेस हाईकमान के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की एकजुटता कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश सहित देश में राहुल गांधी विरोधी नेताओं को एकजुट करने में भी मददगार साबित होगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण नाम अरुण यादव का है, जो प्रदेश में कांग्रेस के लिए ओबीसी वर्ग का सबसे बड़ा चेहरा हैं।

विवाद से मुलाकात तक

बता दें कि, दोनों दिग्गज नेताओं के बीच बयानबाजी का यह दौर लगभग पखवाड़ेभर चला। लेकिन दिल्ली में हुई मुलाकात ने तस्वीर बदल दी। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनके और कमल नाथ के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मनभेद कभी नहीं रहे। यह संदेश कांग्रेस खेमे में बड़े राजनीतिक संकेत की तरह देखा गया।

कुल मिलाकर, कमल नाथ और दिग्विजय सिंह की एकजुटता कांग्रेस के लिए एक दो धारी तलवार है। एक ओर यह पार्टी को प्रदेश स्तर पर मजबूत कर सकती है, वहीं दूसरी ओर हाईकमान और राहुल गांधी की नेतृत्व शैली को चुनौती दे सकती है। यदि अरुण यादव भी इसमें शामिल हो जाते हैं तो यह समीकरण आने वाले वर्षों में कांग्रेस की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है।

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