बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रही हिंसा का एक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। शरियतपुर जिले के डामुड्या उपजिला में 50 वर्षीय हिंदू कारोबारी खोकन चंद्र दास (खोकन दास) पर नए साल की पूर्व संध्या (31 दिसंबर 2025) को भीड़ ने क्रूर हमला किया। हमलावरों ने उन्हें धारदार हथियारों से काटा, पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। प्राण बचाने के लिए खोकन ने सड़क किनारे एक तालाब में छलांग लगा दी,
खोकन की पत्नी सीमा दास ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारा परिवार शांतिप्रिय है। किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। हम सिर्फ हिंदू हैं और शांति से जीना चाहते हैं।” उन्होंने बताया कि खोकन ने अस्पताल में दो हमलावरों के नाम बताए थे—सोहाग खान (27, बाबुल खान का बेटा) और राब्बी मोल्ला (21, समसुद्दीन मोल्ला का बेटा)। बाद में पुलिस ने तीसरे आरोपी पलाश सरदार (25) का भी नाम शामिल किया।
यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की श्रृंखला में चौथी है। दिसंबर 2025 में ही दीपू चंद्र दास (मयमंसिंह) को ब्लासफेमी के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया और शव को लटकाकर जला दिया गया। अमृत मंडल (राजबाड़ी) को एक्सटॉर्शन के आरोप में लिंच किया गया।
खोकन दास की मौत ने हिंदू समुदाय में भय का माहौल पैदा कर दिया है। पड़ोसी कहते हैं कि अब हर कोई असुरक्षित महसूस कर रहा है। परिवार की मांग है कि अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए। बांग्लादेश सरकार ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का वादा किया है, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों ने इन घटनाओं की निंदा की है। यह मामला बांग्लादेश में धार्मिक सहिष्णुता और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है।
