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अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के न होने पर एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि डील पूरी तरह तैयार थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया, इसलिए समझौता नहीं हो सका। यह बयान 8 जनवरी 2026 को ऑल-इन पॉडकास्ट में अमेरिकी उद्यमी चमाथ पालिहापितिया के साथ बातचीत के दौरान दिया गया।

गौरतलब हैं कि, यह दावा जनवरी 2026 में आया है, जबकि ट्रेड नेगोशिएशंस 2025 में तेज हुए थे। फरवरी 2025 में दोनों देशों के नेताओं ने अधिकारियों को नेगोशिएट करने का निर्देश दिया था, लक्ष्य था कि पहला फेज 2025 के अंत तक पूरा हो। लेकिन बातचीत में कई दौर चले, दिसंबर 2025 में अमेरिकी टीम नई दिल्ली आई, फिर भी डील नहीं बनी।

जानकारी दे दें कि, ट्रंप प्रशासन ने 2025 में ‘लिबरेशन डे टैरिफ्स’ के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए, जिसमें भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ (25 प्रतिशत रेसिप्रोकल और 25 प्रतिशत रशियन ऑयल पेनल्टी) अगस्त 2025 से लागू है। लटनिक ने कहा कि भारत ने बाद में डील के लिए वापस संपर्क किया, लेकिन तब तक शर्तें बदल चुकी थीं। अब भारत पुरानी शर्तों पर डील चाहता है, लेकिन ऑफर एक्सपायर हो चुका है।

बता दें कि, लटनिक का बयान ट्रंप की डील-मेकिंग स्टाइल को दर्शाता है, जहां पर्सनल कॉल और स्पीड महत्वपूर्ण हैं। भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। आने वाले दिनों में नेगोशिएशंस जारी रहेंगे, लेकिन टैरिफ का दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए डिप्लोमेटिक तरीके से जवाब देगा। यह घटना दिखाती है कि ट्रेड डील्स में नीति के साथ-साथ पर्सनल डिप्लोमेसी भी निर्णायक होती है।

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