मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में Gen-Z और Gen-अल्फा यानी नई युवा पीढ़ी के साथ संवाद किया। यह आउटरीच इवेंट दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के दो हफ्ते बाद आयोजित हुआ था। संघ प्रमुख शायद ही कभी अंग्रेजी में बोलते हैं, लेकिन इस संवाद में उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में बातचीत की।
संवाद के दौरान मोहन भागवत ने युवाओं की शिकायतों को सुना और उन्हें स्वीकार भी किया। उन्होंने बेरोजगारी, शिक्षा और आरक्षण के मुद्दों पर चर्चा की। भागवत ने कहा कि अगर Gen-Z विरोध कर रहा है तो यह देश-विरोधी नहीं है। वे हमारे अपने लोग हैं और हमारी अगली पीढ़ी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि Gen-Z और Gen-अल्फा मौजूदा पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार, देशभक्त हैं और सेवा का जज्बा रखते हैं।
अंत में हम आपको बता दें कि, संघ प्रमुख ने छात्रों के विरोध करने के अधिकार का बचाव किया और इस बात को खारिज किया कि विरोध करने वाले युवाओं को राष्ट्र-विरोधी करार दिया जाए। उन्होंने जोर दिया कि विरोध भी लोकतांत्रिक बातचीत का एक तरीका हो सकता है। जब संवाद नहीं होता तो विरोध मुद्दों को चर्चा में लाने का जरिया बन जाता है। भागवत ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि आंदोलन करने के कुछ तरीके होते हैं।भागवत ने युवा पीढ़ी के बारे में यह बुनियादी बात समझी कि यह सवाल पूछती है और तार्किक जवाब की उम्मीद करती है। उन्होंने कहा कि असली लीडर अंदर से काम करते हैं और मिसाल कायम करके नेतृत्व करते हैं। मुंबई में हुए इस संवाद को संघ प्रमुख द्वारा युवा पीढ़ी के साथ जुड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
