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नई दिल्ली। धान की नर्सरी तैयार करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने से किसानों की खेती की लागत आधी तक कम हो सकती है। पारंपरिक तरीके से नर्सरी डालने पर ज्यादा बीज लगता है, बीमारियां लगती हैं और रोपाई के समय लेबर खर्च बढ़ जाता है। शुरुआती स्टेज में सही देखभाल से बाद में खाद और कीटनाशकों पर खर्च बच जाता है।

बीज का सही ट्रीटमेंट जरूरी
लागत कम करने का मुख्य तरीका बीज शोधन यानी सीड ट्रीटमेंट है। बाजार से बीज लाकर सीधे खेत में डालने के बजाय उसे फंगीसाइड या जैविक घोल से उपचारित करें। पानी में भिगोते समय कार्बेंडाजिम जैसी दवा मिलाने से फंगस और जड़ों की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। नर्सरी के बेड को समतल बनाकर शाम के समय हल्की सिंचाई करने से बीज का अंकुरण बेहतर होता है, जिससे कम बीज में घनी और स्वस्थ पौध तैयार होती है।

समय पर रोपाई और पोषण का ध्यान
धान की नर्सरी को 25-30 दिन से ज्यादा पुराना नहीं होने देना चाहिए। 20 से 22 दिन की पौध रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त होती है। ऐसी पौध मुख्य खेत में लगाने पर कल्ले तेजी से और ज्यादा संख्या में निकलते हैं, जिससे पैदावार बढ़ती है। नर्सरी तैयार करते समय आखिरी जुताई में गोबर की सड़ी खाद के साथ डीएपी और पोटाश की संतुलित मात्रा दें। इससे मिट्टी की नमी बनाए रखने की क्षमता सुधरती है। स्वस्थ और सही उम्र की पौध उखाड़ने पर जड़ें नहीं टूटतीं, लेबर समय बचता है और रोपाई के बाद फसल तुरंत ग्रोथ पकड़ लेती है।

बीज शोधन से होती है लागत में बचत

धान की खेती में लागत कम करने का सबसे प्रभावी उपाय बीज शोधन (सीड ट्रीटमेंट) माना जाता है। कई किसान बाजार से बीज खरीदकर सीधे नर्सरी में बो देते हैं, लेकिन इससे बीज जनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बीज बोने से पहले उसका उपचार फफूंदनाशी दवा या जैविक घोल से करना चाहिए। बीज को पानी में भिगोते समय कार्बेंडाजिम जैसे उपयुक्त फफूंदनाशी का उपयोग करने से फफूंद और जड़ों से संबंधित कई बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है। जैविक खेती करने वाले किसान अनुमोदित जैविक बीज उपचार विधियों का भी उपयोग कर सकते हैं।

बीज शोधन के कारण अंकुरण बेहतर होता है और कम बीज में भी अधिक स्वस्थ पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इससे बीज की मात्रा कम लगती है और शुरुआती लागत में बचत होती है।

किसान कैसे बढ़ा सकते हैं लाभ?

धान की खेती में बेहतर उत्पादन और कम लागत के लिए किसानों को प्रमाणित बीज का चयन करना चाहिए, बीज शोधन अवश्य करना चाहिए, नर्सरी को समतल रखना चाहिए, संतुलित पोषण देना चाहिए और सही समय पर रोपाई करनी चाहिए। इसके अलावा मौसम की स्थिति और स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाना भी लाभदायक रहता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि खेती में सफलता केवल अधिक निवेश पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही समय पर सही तकनीक अपनाने पर भी निर्भर करती है। यदि किसान नर्सरी तैयार करने के दौरान वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का पालन करें, तो उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त कर सकते हैं।

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