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राहुल गांधी ने हाल ही में सार्वजनिक मंचों पर दावा किया था कि मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ियां हैं और ‘वोट चोरी’ के जरिये लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि इस मुद्दे पर तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो देश की चुनावी प्रणाली पर से जनता का विश्वास उठ सकता है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में डुप्लिकेट और फर्जी प्रविष्टियों की भरमार है, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।

जानकारी दे दें कि, वकील रोहित पांडे की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि इस गंभीर मुद्दे की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल (SIT) से कराई जानी चाहिए।

भारत के संविधान में प्रत्येक नागरिक को मतदान का मौलिक अधिकार दिया गया है। यह अधिकार तभी सार्थक बनता है जब मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी न हो और चुनाव निष्पक्ष हों। यदि मतदाता सूचियों में फर्जी नाम या डुप्लिकेट प्रविष्टियां हों, तो यह न केवल लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ जाता है। इसलिए इस याचिका को केवल राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के संरक्षण से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

बता दें कि, राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर दाखिल यह याचिका भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अहम परीक्षा बन सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या फैसला सुनाता है। यदि अदालत ने SIT जांच और स्वतंत्र ऑडिट की मांग को मान लिया, तो यह देश की चुनावी प्रणाली में व्यापक बदलाव ला सकता है। वहीं अगर आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका भी हो सकता है।

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