अयोध्या ।अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी को बैंक खातों के लेनदेन में बड़ा अंतर मिला है। चोरी का मामला उजागर होने से पहले ट्रस्ट के एसबीआई और पीएनबी बैंक खातों में रोजाना 16 से 18 लाख रुपये जमा हो रहे थे।चोरी सामने आने के बाद यह राशि बढ़कर प्रतिदिन 24 से 26 लाख रुपये हो गई है। एसआईटी को शक है कि पहले हर रोज 6 से 8 लाख रुपये की चोरी हो रही थी। जांच एजेंसी ने इस वित्तीय अंतर को अपनी जांच का अहम आधार बनाया है।
एसआईटी ने इस मामले में एसबीआई बैंक के मैनेजर समेत कुल 10 बैंक कर्मियों से पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने बैंक से संबंधित जरूरी दस्तावेज और लेनदेन का पूरा हिसाब-किताब अपने कब्जे में ले लिया है। इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में दो से तीन लोगों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एसआईटी इनकी गतिविधियों की गहराई से पड़ताल कर रही है और आगे बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है। यह मामला 4 जुलाई 2026 को लखनऊ से रिपोर्ट किया गया।
जमा राशि में बढ़ोतरी ने खड़े किए कई सवाल
एसआईटी द्वारा जुटाए गए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, चोरी की घटना सामने आने से पहले मंदिर ट्रस्ट के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के खातों में प्रतिदिन 16 से 18 लाख रुपये जमा किए जा रहे थे। लेकिन जैसे ही कथित चोरी का मामला सामने आया, बैंक खातों में जमा होने वाली दैनिक राशि अचानक बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये तक पहुंच गई।
जांच अधिकारियों का मानना है कि दोनों अवधियों के बीच प्रतिदिन लगभग 6 से 8 लाख रुपये का अंतर दिखाई दे रहा है। इसी आधार पर एसआईटी यह जांच कर रही है कि कहीं पहले चढ़ावे की राशि का कुछ हिस्सा बैंक में जमा होने से पहले ही कथित रूप से गायब तो नहीं किया जा रहा था। हालांकि, यह फिलहाल जांच का विषय है और इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
दस्तावेजों की बारीकी से हो रही जांच
एसआईटी केवल बैंक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि नकदी जमा करने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। जांच अधिकारी यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि चढ़ावे की गिनती, पैकेजिंग, परिवहन और बैंक में जमा करने के दौरान कौन-कौन से कर्मचारी या अधिकारी जिम्मेदार थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई होगी तो उसका संकेत बैंक रिकॉर्ड, नकदी जमा पर्चियों और संबंधित दस्तावेजों के मिलान से मिल सकता है। इसी कारण जांच एजेंसी सभी रिकॉर्ड का सूक्ष्म विश्लेषण कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी आने वाले दिनों में कुछ अन्य संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ कर सकती है। साथ ही बैंक रिकॉर्ड और मंदिर प्रशासन से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की फॉरेंसिक स्तर पर भी समीक्षा की जा सकती है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
4 जुलाई 2026 को लखनऊ से सामने आई इस रिपोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। तब तक इस मामले को जांचाधीन विषय के रूप में ही देखा जाना चाहिए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक तथ्यों का इंतजार करना उचित होगा।
