अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि के बारे में जानकारी जुटाई है। जांच दल वैदेही भवन पहुंचा, जहां गोविंददेव गिरि अयोध्या प्रवास के दौरान ठहरते हैं। टीम ने वहां के महंत और सेवादारों से उनके प्रवास काल की गतिविधियों तथा आने-जाने वालों का विवरण लिया।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने कोषाध्यक्ष के रूप में गोविंददेव गिरि की प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों की भी जांच आगे बढ़ाई है। बुधवार को पुलिस रिमांड पर लिए गए आरोपित रमाशंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव से पूछताछ की गई। उन्होंने कुछ नए तथ्य बताए, जिनसे विवेचना की दिशा बदल सकती है। पूछताछ के दौरान रमाशंकर मिश्र के आवास पर भी टीम पहुंची और साक्ष्य जुटाए।
इस मामले में जेल भेजे गए आठ आरोपितों में से छह का पुलिस कस्टडी रिमांड पूरा हो चुका है। अब रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उनके भतीजे मनीष यादव को रिमांड पर लिया जाएगा। चढ़ावा चोरी का मामला 6 जून को सामने आया था, जिसके बाद योगी सरकार ने एसआईटी गठित की। मंदिर में दान गिनती प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है।
वैदेही भवन पहुंची एसआईटी, जुटाई प्रवास से जुड़ी जानकारी
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की टीम अयोध्या स्थित वैदेही भवन पहुंची, जहां गोविंददेव गिरि अपने अयोध्या प्रवास के दौरान ठहरते हैं। जांच अधिकारियों ने वहां के महंत और सेवादारों से बातचीत कर उनके आने-जाने, मुलाकात करने वाले लोगों और प्रवास के दौरान हुई गतिविधियों के संबंध में जानकारी एकत्र की।
जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावा प्रबंधन और उससे संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किन-किन स्तरों पर जिम्मेदारियां तय थीं और क्या किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है। फिलहाल यह पूरी कवायद साक्ष्य जुटाने और तथ्यों की पुष्टि करने के लिए की जा रही है।
आने वाले दिनों में एसआईटी अन्य संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ कर सकती है। साथ ही वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण जारी रहेगा। पुलिस रिमांड पर लिए जाने वाले अन्य आरोपितों से पूछताछ के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होने की संभावना है।राम मंदिर देश की आस्था का प्रमुख केंद्र है, इसलिए इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर सभी की नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित चढ़ावा चोरी की घटना में किसकी क्या भूमिका रही और किन परिस्थितियों में यह मामला सामने आया।
