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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। गांवों से लेकर शहरों तक डेयरी फार्मिंग को रोजगार और आमदनी का एक महत्वपूर्ण जरिया माना जाता है। दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग पूरे साल बनी रहती है, इसलिए कई किसान और ग्रामीण युवा पशुपालन के साथ डेयरी व्यवसाय शुरू करने की योजना बनाते हैं। हालांकि डेयरी शुरू करने के लिए शुरुआती पूंजी की जरूरत होती है। अच्छी नस्ल के दुधारू पशु खरीदने, पक्का पशु शेड बनाने, चारा रखने और काटने की व्यवस्था करने तथा दूध निकालने के लिए जरूरी उपकरण लगाने में अच्छी-खासी रकम खर्च हो सकती है।

किन योजनाओं में मिलती है सब्सिडी

नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत अलग-अलग स्तर पर डेयरी शुरू करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना और नंदिनी कृषक समृद्धि योजना शामिल हैं। साहीवाल, गिर, थारपारकर जैसी स्वदेशी नस्ल की दो से चार दुधारू गायों से छोटी शुरुआत करने पर सरकार कुल लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देती है। 25 दुधारू गायों वाली बड़ी कमर्शियल डेयरी यूनिट लगाने पर प्रोजेक्ट कॉस्ट पर 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 15 से 30 लाख रुपये तक की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में भेज दी जाती है। यह सब्सिडी गायों की खरीद, चारे, पक्के शेड, ऑटोमैटिक मिल्किंग मशीन और तीन साल के पशु बीमा खर्च को कवर करती है।

आवेदन से पहले क्या जरूरी है

इस सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए और उसके पास पशुपालन का कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए। पशुओं के शेड और हरे चारे की बुवाई के लिए अपनी खुद की या सात से दस साल के रजिस्टर्ड लीज वाली जमीन होनी चाहिए। दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, निवास प्रमाण पत्र और जमीन की खतौनी की नई नकल जरूरी हैं। पशुपालन विभाग या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से डेयरी फार्मिंग की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट होने से आवेदन के चयन की संभावना बढ़ जाती है।

कैसे करें आवेदन

पशुपालन विभाग के आधिकारिक नंद बाबा मिशन पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है। पोर्टल पर बेसिक डिटेल, जमीन की जानकारी और योजना के तहत पशुओं की संख्या चुनकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। फॉर्म जमा होने के बाद जिला स्तर पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति दस्तावेजों और मौके पर जमीन का भौतिक सत्यापन करती है। सत्यापन सही पाए जाने पर प्रोजेक्ट को मंजूरी देकर बैंक से लोन पास कराया जाता है। यूनिट शुरू करने और पशु खरीदने के बाद सरकार सब्सिडी की रकम सीधे बैंक लोन खाते में ट्रांसफर कर देती है।

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