मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। दोनों देशों के बीच एक बार फिर टकराव और हमलों की खबरों के बाद निवेशकों तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है और ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है।
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने से बाजार चिंतित
इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे अहम रास्तों में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20 प्रतिशत हिस्से की आपूर्ति में इस मार्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव की खबरें इसी संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में ईरान के एक द्वीप पर हमला किया, जिसके बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई।
फिलहाल 31 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सबसे बड़ी चर्चा अमेरिका-ईरान तनाव और उसके प्रभाव की है। ब्रेंट क्रूड का फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना इस बात का संकेत है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता का असर अब सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। दुनिया भर के देश, निवेशक और ऊर्जा कंपनियां अब इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
