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भारत की राजनीति में उपराष्ट्रपति का चुनाव हमेशा से खास अहमियत रखता है। उपराष्ट्रपति न केवल राज्यसभा के सभापति होते हैं, बल्कि संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति के बाद दूसरे सर्वोच्च पद पर आसीन होते हैं। इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीख 9 सितंबर तय हुई है और इसके लिए सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) और विपक्षी इंडी गठबंधन (INDI Alliance) के बीच सियासी खींचतान शुरू हो गई है।

दूसरी ओर, इंडी गठबंधन ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी, आरजेडी और डीएमके जैसे दलों के बीच इस मुद्दे पर मंथन जारी है। विपक्ष की दुविधा यह है कि संख्याबल में वह एनडीए से काफी पीछे है। यदि वे उम्मीदवार खड़ा भी करते हैं, तो जीत की संभावना कम है।

बता दें कि, वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो एनडीए का पलड़ा स्पष्ट रूप से भारी है। लोकसभा और राज्यसभा में उनकी ताकत विपक्ष से कहीं अधिक है। सीपी राधाकृष्णन का नाम घोषित होते ही यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे देश के अगले उपराष्ट्रपति होंगे हालांकि, राजनीति में अंतिम वक्त पर समीकरण बदलना नई बात नहीं है। विपक्ष यदि कोई बड़ा और सर्वमान्य चेहरा लाता है, तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। लेकिन फिलहाल गणित और परिस्थितियां एनडीए की जीत की ओर इशारा कर रही हैं।

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