नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक बिना किसी ड्यूटी के 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दे दी है। यह कदम त्योहारी सीजन से पहले उठाया गया है। आलोचकों का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण चीनी की कमी हुई है, जिससे कीमतें बढ़ीं और अब आयात किया जा रहा है।
जानकारी यहां देते चले कि, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यहां हर साल औसतन 30 से 35 मिलियन मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023-24 में 34 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हुआ, जिसमें से 2.20 मिलियन टन इथेनॉल के लिए उपयोग किया गया। साल 2024-25 में 29.70 मिलियन टन उत्पादन हुआ और 1.70 मिलियन टन इथेनॉल में डायवर्ट किया गया। साल 2025-26 में अब तक 32.40 मिलियन टन उत्पादन हुआ है, जिसमें से 3.10 मिलियन टन इथेनॉल में उपयोग किया गया है। इस तरह चीनी उत्पादन का बहुत कम हिस्सा इथेनॉल में जा रहा है।
हम आपको बता दें कि, भारत में हर साल चीनी की घरेलू खपत लगभग 28 से 28.5 मिलियन टन है। वर्तमान सीजन 2025-26 में शुद्ध उत्पादन 27.9 मिलियन टन रहने के कारण यह खपत से थोड़ा कम है, जिसकी वजह से सरकार को आपातकालीन आयात का फैसला लेना पड़ा। चालू सीजन में लगभग 5.74 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती हुई है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से मिलकर देश का 80 प्रतिशत चीनी उत्पादन होता है।
गौरतलब हैं कि, भारत पिछले 10 सालों से चीनी का आयात नहीं कर रहा था क्योंकि उस पर 100 प्रतिशत ड्यूटी लगती है। आखिरी बार 2016-17 में सूखे के कारण आयात करना पड़ा था। सरकार ने 2025-26 मार्केटिंग सीजन के लिए 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है, जो मुख्य रूप से सोमालिया, सूडान और जिबूती जैसे देशों को भेजी जाएगी। 20 अगस्त तक महाराष्ट्र में चीनी की अधिकतम कीमत 4850 रुपये प्रति क्विंटल, असम में 5600 रुपये प्रति क्विंटल और जयपुर में 4475 रुपये प्रति क्विंटल रही। पिछले एक महीने में चीनी की कीमतें 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।
