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नई दिल्लीबारिश के मौसम में गन्ने की फसल तेजी से बढ़ती है, लेकिन कीटों का हमला भी बढ़ जाता है। किसान महंगी दवाओं का छिड़काव करते हैं, लेकिन बारिश में दवा का असर कम हो जाता है। ट्राइकोकार्ड का इस्तेमाल कर सिर्फ 100 रुपये में गन्ने को कीड़ों से बचाया जा सकता है।

बारिश के मौसम में गन्ने पर तीन बड़े बेधक कीड़े हमला करते हैं। ये कीड़े पौधे के अंदर घुसकर उसे खोखला कर देते हैं, जिससे बढ़वार रुक जाती है। रासायनिक दवाओं का छिड़काव मुश्किल हो जाता है, क्योंकि बारिश दवा को धो देती है। इससे किसानों को दोहरा नुकसान होता है।

ट्राइकोकार्ड एक जैविक उपाय है। इसमें छोटे परजीवी कीड़े होते हैं जो नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों के अंडों को खाकर खत्म कर देते हैं। इससे कीड़े बड़े होने से पहले मर जाते हैं। दो ट्राइकोकार्ड एक बड़े खेत के लिए काफी होते हैं। इसे लगाने के लिए मशीन या स्प्रे पंप की जरूरत नहीं पड़ती, बस खेत में सही जगह रखना होता है।ट्राइकोकार्ड से लागत कम होती है, महंगी दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती और फसल पूरी तरह जैविक तरीके से सुरक्षित रहती है। पौधे स्वस्थ रहने से उपज भी बढ़ती है।

बारिश में क्यों बढ़ जाता है कीटों का खतरा?

मानसून के दौरान गन्ने की फसल तेजी से विकसित होती है। नमी और अनुकूल तापमान के कारण कई प्रकार के कीट भी सक्रिय हो जाते हैं। विशेष रूप से बेधक (Borer) कीट गन्ने के लिए सबसे अधिक नुकसानदायक माने जाते हैं।

ये कीट पौधे के तने में प्रवेश कर अंदर से उसे नुकसान पहुंचाते हैं। परिणामस्वरूप पौधा कमजोर हो जाता है, उसकी बढ़वार रुक सकती है और उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए तो उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

क्या है ट्राइकोकार्ड?

ट्राइकोकार्ड एक जैविक कीट नियंत्रण तकनीक है, जिसका उपयोग समेकित कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM) के अंतर्गत किया जाता है। इसमें सूक्ष्म परजीवी ततैया (Parasitoid Wasps) के अंडे विशेष कार्ड पर लगाए जाते हैं।

ये लाभकारी परजीवी उन हानिकारक कीटों के अंडों पर हमला करते हैं जो गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। परजीवी कीट उन अंडों के भीतर विकसित होकर उन्हें नष्ट कर देते हैं। इससे नुकसान पहुंचाने वाले कीट लार्वा या वयस्क बनने से पहले ही समाप्त हो जाते हैं।

इस जैविक प्रक्रिया के कारण कीटों की संख्या स्वाभाविक रूप से कम होती है और फसल को बिना रासायनिक दवाओं के संरक्षण मिल सकता है।

अंत मे चलते चलते बता दे कि, बढ़ती खेती लागत और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए जैविक कीट नियंत्रण तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ट्राइकोकार्ड ऐसी ही एक तकनीक है, जो कम खर्च में गन्ने की फसल को प्रमुख कीटों से बचाने में सहायक हो सकती है। यदि इसे वैज्ञानिक सलाह और समेकित कीट प्रबंधन के साथ अपनाया जाए, तो किसान रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम कर सकते हैं और स्वस्थ फसल के माध्यम से बेहतर उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

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