कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक संकट गहराता जा रहा है। वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को सीधा संदेश दिया है कि वे तय करें—पार्टी में उन्हें रखना है या फिर राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को।
दरअसल, कल्याण बनर्जी को हाल ही में एक हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा मामले में कानूनी सलाहकार की भूमिका से अचानक हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी रात केस की तैयारी करने के बावजूद उन्हें अपमानजनक तरीके से बाहर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी को अब यह स्पष्ट करना होगा कि वह अभिषेक बनर्जी के साथ खड़ी है या उनके साथ।
इस बयान ने TMC के भीतर पहले से चल रहे असंतोष को और हवा दे दी है। पार्टी के करीब 20 सांसदों का गुट NDA का समर्थन करने की बात कर रहा है, जिससे ममता बनर्जी की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद वरिष्ठ बनाम युवा नेतृत्व की खींचतान को उजागर करता है और पार्टी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को “अहंकारी” बताते हुए आरोप लगाया कि वे वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं करते। वहीं, ममता बनर्जी के सामने अब पार्टी को संभालने और बगावत को रोकने की बड़ी चुनौती है।
