नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की निगरानी के लिए सात देशों से बातचीत कर रहा है। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि मदद करने वाले देशों के लिए अच्छा होगा और न करने वालों के लिए भी अच्छा, क्योंकि देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश इस छोटे प्रयास में सहयोग नहीं करता। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से सहयोग की उम्मीद जताई, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल परिवहन होता है।
ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर राष्ट्रों को इस क्षेत्र की रक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने ईरान के साथ जारी युद्ध के संदर्भ में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर प्रभाव का जिक्र किया। ट्रंप का दावा है कि ईरान की सैन्य उत्पादन क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है, जिससे उसकी मिसाइल और ड्रोन हमलों की संख्या में भारी कमी आई है।
हालांकि, ट्रंप की अपील को कई देशों से ठंडा जवाब मिला है। जापान ने स्पष्ट कहा कि वह होर्मुज में समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन पर विचार नहीं कर रहा है और अमेरिका से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है। ऑस्ट्रेलिया ने भी युद्धपोत न भेजने का ऐलान कर दिया। दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह इस प्रस्ताव पर गौर कर रहा है और अमेरिका के साथ समन्वय बनाए रखेगा। फ्रांस की रक्षा मंत्री ने भी कहा कि युद्ध जारी रहने तक होर्मुज में जंगी जहाज नहीं भेजा जाएगा। तुर्की ने पहले ही इस संघर्ष से दूरी बना ली है।
