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समाचार मिर्ची

वाशिंगटन। 31 जनवरी 2026: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 28 जनवरी को ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने की अंतिम चेतावनी दी, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि तेहरान बातचीत की मेज पर नहीं आया तो अगला हमला पिछले से कहीं अधिक विनाशकारी होगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ईरान जल्दी से बातचीत की मेज पर आए और एक निष्पक्ष समझौता करे – कोई परमाणु हथियार नहीं। समय तेजी से बीत रहा है!” उन्होंने “मैसिव आर्मडा” (विशाल नौसैनिक बेड़ा) का जिक्र किया जो ईरान की ओर बढ़ रहा है और पिछले जून में हुए “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” का हवाला दिया, जिसमें अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था।

वही, ईरान की ओर से इस धमकी का जवाब भी उतना ही आक्रामक रहा। ईरानी सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने कहा कि पिछले साल जून में अमेरिका और इजराइल के साथ 12 दिन तक चले संघर्ष के बाद ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि अब ईरान ने पारंपरिक युद्ध के बजाय ड्रोन और मिसाइल आधारित नेटवर्क युद्ध प्रणाली पर ज्यादा ध्यान दिया है। इसी रणनीति के तहत बड़ी संख्या में आधुनिक ड्रोन तैयार किए गए हैं।

इस कड़ी में बता दें कि, ईरान ने हाल ही में अपने ड्रोन वाहक पोत आईआरआईएस शाहिद बागेरी को भी समुद्र में तैनात किया है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बंदर अब्बास से कुछ किलोमीटर दूर लंगर डाले हुए है। यह पोत ईरान का पहला समर्पित ड्रोन कैरियर है, जो दर्जनों ड्रोन और हेलीकॉप्टर तैनात कर सकता है। ईरानी मीडिया के अनुसार, यह तैनाती अमेरिकी नौसेना के यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के जवाब में की गई है, जो मध्य पूर्व में पहुंच चुका है और तीन विध्वंसकों के साथ क्षेत्र में मौजूद है। अमेरिकी सेना ने पिछले कुछ हफ्तों में क्षेत्र में विमान, बॉम्बर और अन्य संपत्तियां बढ़ाई हैं, जिसे ट्रम्प ने “आर्मडा” करार दिया है।

चलते चलते जानकारी दे दें कि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रम्प की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान दबाव में बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “हमारी सेना ट्रिगर पर उंगली रखे हुए है और किसी भी आक्रामकता का तुरंत और शक्तिशाली जवाब देगी।” ईरान ने परमाणु समझौते के लिए तैयार रहने की बात कही, लेकिन मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को बातचीत से बाहर रखा। तेहरान का कहना है कि अमेरिका की “गनबोट डिप्लोमेसी” क्षेत्र को अस्थिर कर रही है।

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