नई दिल्ली: भारतीय ध्वज वाला टैंकर ‘जग लाडकी’ तिरंगे के साथ संयुक्त अरब अमीरात से 14 मार्च 2026 को रवाना हुआ था। यह जहाज मुर्बन क्रूड ऑयल की 81,000 टन मात्रा लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर लिया है और भारत सरकार तथा शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार जहाज और उसके सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं।
टैंकर मंगलवार 17 मार्च 2026 को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। यह जहाज फुजैराह से क्रूड लोड करने के बाद निकला, जहां हाल के घटनाक्रम के बीच भी उसकी यात्रा बिना किसी समस्या के जारी रही। सरकार ने इसकी सुरक्षा पर नजर रखी हुई है।यह घटनाक्रम क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। ‘जग लाडकी’ का सुरक्षित आगमन भारत के लिए राहत लेकर आया है।
14 मार्च को यूएई से हुआ था रवाना
जानकारी के मुताबिक भारतीय ध्वज वाला यह टैंकर 14 मार्च 2026 को संयुक्त अरब अमीरात से भारत के लिए रवाना हुआ था। जहाज ने यूएई के फुजैराह बंदरगाह से मुर्बन क्रूड ऑयल लोड किया और इसके बाद अपनी समुद्री यात्रा शुरू की।
फुजैराह मध्य पूर्व के प्रमुख ऊर्जा निर्यात केंद्रों में से एक है, जहां से दुनिया के कई देशों को बड़े पैमाने पर कच्चा तेल भेजा जाता है। यहां से निकलने के बाद जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना पड़ा, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक स्तर पर समुद्री रास्ते से होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यही कारण है कि जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता देखने को मिलती है।भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों से आयात करता है।
