लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र इस बार भी गर्मागर्म बहस, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे के बीच गुजर रहा है। मंगलवार को सत्र के दूसरे दिन फतेहपुर के एक मुद्दे पर सपा और भाजपा के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर जमकर निशाना साधा, तो वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पलटवार करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के आरोपों को खारिज कर दिया। पूरे दिन का अधिकांश समय शोरगुल और नारेबाजी में निकल गया।
बताया जा रहा है कि विधानसभा सत्र के दौरान अपना दल कमेरवादी पार्टी की नेता और सपा विधायक पल्लवी पटेल मोबाइल से वीडियो बना रही थीं। सपा विधायक के वीडियो बनाने को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने देख लिया था। मोबाइल से वीडियो बनाता देख सतीश महाना भड़क गए। वे अपनी सीट पर ही खड़े हो गए।
इस दौरान यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पल्लवी पटेल को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने सदन की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सदन में वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक
विधानसभा के नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि सदन की कार्यवाही का ऑडियो या वीडियो रिकॉर्ड करना और उसे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर साझा करना प्रतिबंधित है। यह नियम इसलिए लागू है ताकि सदन में होने वाली कार्यवाही की गरिमा और गोपनीयता बनी रहे। वीडियो और फोटोग्राफी का अधिकार केवल विधानसभा सचिवालय और मान्यता प्राप्त मीडिया को होता है।
यह घटना एक बार फिर इस बहस को जीवित कर देती है कि विधानसभा या संसद में वीडियो रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध कितना उचित है। जहां एक ओर यह गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी है, वहीं दूसरी ओर लोकतंत्र में पारदर्शिता की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
बता दें कि, यह घटना एक बार फिर इस बहस को जीवित कर देती है कि विधानसभा या संसद में वीडियो रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध कितना उचित है। जहां एक ओर यह गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी है, वहीं दूसरी ओर लोकतंत्र में पारदर्शिता की मांग भी लगातार बढ़ रही है।