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वाशिंगटन। अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल पर लागू सामान्य लाइसेंस को नवीनीकृत नहीं करने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को कहा कि हम रूसी और ईरानी तेल पर लागू सामान्य लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे। यह छूट केवल उन कार्गो पर लागू होती थी जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थे।

12 मार्च से पहले लोड किए गए रूसी कार्गो के लिए 30 दिन का सामान्य लाइसेंस समाप्त हो गया है, जबकि ईरानी तेल की छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। इस फैसले से भारत को अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में बदलाव करना पड़ सकता है।

भारत मार्च 2026 में रूसी कच्चे तेल का आयात 1.96 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया, जो फरवरी से 53 प्रतिशत अधिक है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि कच्चे तेल की सोर्सिंग तकनीकी-व्यावसायिक निर्णय हैं। उन्होंने बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पहले ही 40 से अधिक देशों से ऊर्जा स्रोतों के आयात में विविधता लाई है।

भारत के पास लैटिन अमेरिका के देशों ब्राजील, कोलंबिया, इक्वाडोर और गुयाना, पश्चिम अफ्रीका के नाइजीरिया और अंगोला तथा अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने के विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि, इन स्रोतों से रूसी तेल की रियायती कीमत का पूरा विकल्प नहीं मिल पाएगा और आयात लागत बढ़ सकती है।

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