नई दिल्ली।वैशाख पूर्णिमा 2026 शुक्रवार 1 मई को मनाई जाएगी। इस दिन हिंदू धर्म में विशेष व्रत और पूजा का विधान है। शास्त्रों के अनुसार इस पावन तिथि पर गंगा स्नान और दान करने से मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि भगवान बुद्ध ने इसी दिन सत्य की खोज करते हुए ज्ञान प्राप्त किया था। भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर धर्मराज युधिष्ठिर ने इस दिन व्रत रखा, जिससे उन्हें राजसूय यज्ञ के बराबर पुण्य की प्राप्ति हुई। शास्त्र इस तिथि को दान-पुण्य और आत्म-चिंतन के लिए सर्वोत्तम मानते हैं।
इस व्रत को करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। विधि-विधान से पूजा और दान करने पर अनजाने में किए गए पाप, झूठ बोलने या किसी का दिल दुखाने जैसे दोष समाप्त हो जाते हैं। इसे पाप विमोचनी तिथि के समान फलदायी माना गया है, जो नकारात्मकता को मिटाकर मानसिक शांति और दरिद्रता से छुटकारा दिलाता है।
व्रत के नियमों में सात्विक भोजन और व्यवहार रखना, तामसिक चीजों से दूर रहना शामिल है। गर्मी के मौसम में जरूरतमंदों को ठंडे जल और मौसमी फलों का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। रात में चंद्र देव को अर्घ्य देने और सत्यनारायण की कथा सुनने से घर में सुख-शांति आती है। व्रत का पारण सादा भोजन से करना चाहिए।
