कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही राज्यपाल ने पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया। इसके साथ ही ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं।विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने पर राज्यपाल ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत यह फैसला लिया। इस्तीफे को लेकर चल रही सियासी खींचतान के बीच यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में 15 साल पुराना सत्ता का अध्याय अचानक खत्म हो गया।ममता बनर्जी 15 साल बाद सत्ता से बेदखल हुई हैं। इस घटनाक्रम से पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक स्थिति बन गई है।
हालांकि संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार का भंग होना सामान्य प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारतीय संविधान के तहत राज्यपाल ऐसी स्थिति में आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाते हैं ताकि शासन व्यवस्था बनी रहे। इसके बाद नई विधानसभा और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
फिलहाल पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दल अपने-अपने स्तर पर बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं में जुट गए हैं। राज्य की जनता भी अब यह देखने का इंतजार कर रही है कि आगामी राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं और बंगाल की सत्ता का अगला अध्याय किसके हाथों में लिखा जाएगा।
