कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘आइसक्रीम बनाम बर्नोल-बोरोलीन’ का नया विवाद सुर्खियों में है। चुनाव आयोग से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट में बर्नोल और बोरोलीन जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी आपत्ति जताई है। ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार जनता को बर्नोल-बोरोलीन नहीं, बल्कि आइसक्रीम देगी। यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल को गरमा रहा है।
चुनाव आयोग के सोशल मीडिया पोस्ट में बर्नोल और बोरोलीन शब्दों का उल्लेख किया गया था। इन शब्दों को आमतौर पर जलन या घाव के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली क्रीम के रूप में जाना जाता है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे अपनी पार्टी पर अप्रत्यक्ष तंज बताया और कहा कि संवैधानिक संस्था से ऐसे व्यंग्यात्मक संदेश की उम्मीद नहीं की जाती। पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह कदम पक्षपातपूर्ण है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
ममता बनर्जी ने इस पोस्ट पर तीखा पलटवार करते हुए कहा, “हम बर्नोल-बोरोलीन नहीं देंगे, हम आइसक्रीम देंगे।” उन्होंने आइसक्रीम को विकास, राहत और खुशहाली का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री का बयान तेजी से वायरल हो गया और टीएमसी समर्थकों में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया। उन्होंने इसे विपक्ष के इशारे पर किया गया कदम बताया।
टीएमसी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी संस्थाओं को तटस्थ रहना चाहिए। पार्टी ने इस मुद्दे पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही। वहीं, विपक्षी दलों ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग का बचाव किया और ममता बनर्जी के बयान को चुनावी स्टंट करार दिया। इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी तेज बहस छेड़ दी है।
