कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से ही उतार-चढ़ाव और तीव्र प्रतिस्पर्धा से भरी रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य में मजबूत पकड़ बनाई है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लगातार अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। अब इंडिया टुडे और सीवोटर के ताजा ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) सर्वे ने राज्य के राजनीतिक माहौल पर नई रोशनी डाली है। यह सर्वे जनवरी 2026 में जारी किया गया है, जिसमें अगर आज लोकसभा चुनाव होते हैं तो पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर क्या स्थिति बन सकती है, इसका अनुमान लगाया गया है।
इस संबंध में जानकारी दे दें कि, टीएमसी की मजबूती के पीछे कई कारण हैं। ममता बनर्जी की छवि ‘दिदी’ के रूप में महिलाओं, अल्पसंख्यकों और ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत है। विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं जैसे लक्ष्मीर भंडार, दुआरे सरकार आदि ने पार्टी को जनता से जोड़े रखा है। हालांकि, राज्य में भर्ती घोटाले, राजनीतिक हिंसा, कानून-व्यवस्था की स्थिति और कुछ अन्य मुद्दों पर टीएमसी की आलोचना होती रही है। सर्वे में इन मुद्दों के बावजूद टीएमसी की स्थिति मजबूत दिख रही है, जो बताता है कि विपक्ष इन मुद्दों को बड़े पैमाने पर वोट में तब्दील नहीं कर पाया है।
वही, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की लोकप्रियता का बड़ा कारण उनकी क्षेत्रीय पहचान और केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर रुख रहा है। ममता बनर्जी खुद को बंगाल की अस्मिता की रक्षक के रूप में पेश करती रही हैं, जिसका असर खासतौर पर ग्रामीण और अल्पसंख्यक मतदाताओं पर देखने को मिलता है। इसके अलावा, राज्य सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाएं भी टीएमसी के पक्ष में माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
बता दें कि, विधानसभा चुनाव के संदर्भ में यह सर्वे टीएमसी के लिए उत्साहजनक है, क्योंकि लोकसभा में मजबूत प्रदर्शन अक्सर विधानसभा में भी फायदेमंद साबित होता है। हालांकि, बीजेपी के लिए यह एक प्रोत्साहन है कि वह अपनी सीटें बढ़ा रही है। कांग्रेस और वाम मोर्चा के लिए स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि उनकी उपस्थिति नगण्य दिख रही है।
कुल मिलाकर, MOTN सर्वे बताता है कि ममता बनर्जी की लोकप्रियता अभी बरकरार है और टीएमसी राज्य में प्रमुख ताकत बनी हुई है। बीजेपी ने सेंध लगाई है, लेकिन अभी बड़ा बदलाव नहीं ला पाई है। आने वाले महीनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी, और अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा। (शब्द संख्या: लगभग 1050)
