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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची के संशोधन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत 28 फरवरी को जारी पोस्ट-एसआईआर मतदाता सूची में करीब 66 लाख नाम हटाए जाने की संभावना है। इसके अलावा लगभग 60 लाख मतदाताओं को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है। यह प्रक्रिया पिछले नवंबर से शुरू हुई थी और आगामी चुनावों से पहले मतदाता गणित में बड़े पैमाने पर फेरबदल ला सकती है।

विभिन्न जिलों में दर्ज बड़े बदलावों के कारण कई विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण प्रभावित होने की आशंका है। चुनाव आयोग ने इसे मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया बताया है, लेकिन ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर 60.06 लाख मामलों को विचाराधीन रखा गया है। आने वाले हफ्तों में न्यायिक अधिकारी इन पर फैसला लेंगे, जिससे आंकड़ों में और बदलाव संभव है। नए फॉर्म-6 के माध्यम से जुड़ाव और फॉर्म-7 पर आपत्तियों के बाद स्थिति बदल सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर इस बार बंगाल विधानसभा चुनाव में ‘गेम चेंजर’ मुद्दा बन सकता है। मतदाता सूची से नाम हटने और विचाराधीन श्रेणी के कारण लाखों मतदाताओं का मताधिकार प्रभावित होने की वजह से राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। यह विवाद अन्य सभी मुद्दों को पीछे छोड़कर सबसे प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है।

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