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नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन बिल को विपक्ष ने खारिज कर दिया। बिल में प्रस्ताव था कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ जाएगी। एनडीए दो-तिहाई बहुमत जुटाने में नाकाम रहा, जिसके कारण मोदी सरकार को 12 साल में पहली विधायिक हार का सामना करना पड़ा।

वोटिंग के दौरान समर्थन में 298 वोट पड़े जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। बिल पास होने के लिए सदन में मौजूद सदस्यों में से करीब 352 वोटों की जरूरत थी। बिल पास न होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दो अन्य बिल वापस ले लिए, जिनमें से एक परिसीमन से संबंधित था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटिंग से पहले सदस्यों से अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार ने तथ्यों और तर्क के आधार पर सभी आशंकाओं और गलतफहमियों को दूर कर दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने दो दिनों तक चली बहस में आक्रामक रुख अपनाया और दक्षिण भारत के साथ भेदभाव के आरोपों को खारिज किया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया है। 23 अप्रैल को हम दिल्ली के अहंकार को और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को भी मिलकर हरा देंगे।” विपक्षी दलों ने बिल को 2029 से महिलाओं को आरक्षण देने का वादा बताते हुए इसे दक्षिण राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम करने और राजनीतिक नक्शा बदलने की चाल करार दिया।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी बिल की हार को मोदी सरकार की हार बताया। एनडीए की ओर से देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष पर राजनीति को प्रगति पर भारी बताते हुए प्रतिक्रिया दी।

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