आखिर हमारा समाज और देश किस ओर जा रहा है, जहां एक 13 वर्ष की बच्ची के साथ कई लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया? शासन, प्रशासन और उन लोगों को शर्म आनी चाहिए जिन्होंने ऐसी गंदी औलादों को जन्म दिया। यह राजस्थान राज्य की एक घटना है। ऐसी घटनाएं देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही हैं। जो सामने आ जाती हैं, वे मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुँचती हैं, और जो दबा दी जाती हैं, वे धर्म के ठेकेदारों, पुलिस प्रशासन की नाकामयाबी, दबाव या माता‑पिता के बदनामी के डर के कारण छिप जाती हैं। यही कारण है कि आज बच्चियां चाहे किसी भी उम्र की हों, अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं। यह एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है।
हमारी दबाव‑छिपाव की नीति के चलते नौबत यहां तक पहुँच गई है। अपराधियों को कठोरतम सजा मिलने के बावजूद अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? यह सोचने वाली बात है। गलती कहाँ हो रही है, यह विचारणीय मुद्दा है जिसे गंभीरता से लेना होगा। शासन ने हर गली में शराब की दुकान खुलवा दी है। बच्चे चाहे गांव के हों या शहर के, हर प्रकार का नशा कर रहे हैं। घर का माहौल, माता‑पिता का आचरण भी आज की पीढ़ी पर असर डाल रहा है। मर्यादा, गरिमा, एक‑दूसरे का सम्मान, बहन का आदर सब भूलते जा रहे हैं। इसी कारण कामवासना हावी हो रही है।
हाल ही की घटना में नाबालिग लड़कों ने एक 7 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। कितनी शर्म की बात है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अश्लील वीडियो बच्चों को मानसिक रूप से विकृत बना रहे हैं। आर्थिक स्थितियां भी जिम्मेदार हैं। बहुत से लोग अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करते हैं और पैसे कमाते हैं।
हमारा बड़ा सवाल समाज के उन ठेकेदारों से है जो विभिन्न प्रकार के संगठन चला रहे हैं, लेकिन क्या इस गंभीर स्थिति को संभालने के लिए उनके पास कोई ठोस योजना है? राजनीति, प्रशासन और शासन में उच्च पदों पर बैठे लोग जो पूरे समाज और देश के संचालन की जिम्मेदारी लिए हुए हैं, वे पुराने घिसे‑पिटे कानूनों पर ही क्यों निर्भर हैं? क्या उनके पास कोई नई संशोधित योजना नहीं है? गली‑गली, मोहल्लों में हैवानियत का तांडव दिखाई नहीं देता? मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं पर शासन कोई कड़ा एक्शन क्यों नहीं लेता?
हमारा मानना है कि 13 साल की बच्ची के साथ हैवानियत करने वाले दरिंदों को त्वरित ट्रायल के बाद कठोरतम सजा दी जाए। यदि ऐसा कड़ा एक्शन लिया जाए तो विश्वास मानिए कोई भी ऐसी दरिंदगी करने का ख्याल सपने में भी नहीं लाएगा। लेकिन अफसोस, हमारा कानून लचीला है। अभी तो कई प्रक्रियाएं चलेंगी। शासन कड़ा एक्शन नहीं लेगा। होटल या घर तोड़ना समस्या का समाधान नहीं है। समस्या की जड़ तक पहुँचना होगा। यह अपराध उत्पन्न कहाँ से हो रहे हैं और क्यों? वही से सफाई करनी होगी।

एक बड़ा अभियान चलाना होगा। स्कूलों के शिक्षक छोटे बच्चों को नैतिक शिक्षा दें। माता‑पिता को भी बच्चों के सामने मर्यादा में रहना होगा। अच्छे संस्कार और सम्मान की भावना बच्चों में विकसित करनी होगी। बच्चे क्या देख रहे हैं, उस पर भी नजर रखनी होगी। नशे की तरफ बच्चा या युवा न जाए, इस पर शासन‑प्रशासन को लगाम लगानी होगी क्योंकि अधिकतर अपराध नशे के बाद ही किए जाते हैं। कुछ लोगों के पास सोचने के लिए कुछ रचनात्मक नहीं है, वे यही सोचते हैं कि आज किस लड़की को शिकार बनाया जाए।
हम बाघ संरक्षण पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि बालिका संरक्षण पर भी काम करने की आवश्यकता है। महिलाओं और बालिकाओं के संरक्षण की बहुत सारी योजनाएं शासन के पास हैं, लेकिन सब ठंडे बस्ते में हैं। संरक्षण प्रकोष्ठ बने हैं, उनके अध्यक्ष और सदस्य सब राजनीतिक होते हैं जिन पर आला कमान की मेहरबानी होती है। उन्हें ग्राउंड रियलिटी ही नहीं मालूम, तो समाधान क्या करेंगे? आज तक कोई फील्ड में नहीं गया। सब कमरे में बैठकर कार्यकाल का सुख भोगते हैं और फाइलों में सब चलता रहता है।
महिला आयोग भी बना है। क्या महिलाओं और बालिकाओं के संरक्षण के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई है? और यदि बनाई भी है तो फील्ड में क्यों नहीं दिखाई देती? हर महिला और बालिका के साथ हो रहे अनैतिक कृत्य की जिम्मेदारी और समस्याओं के निराकरण की जिम्मेदारी शासन, प्रशासन, कानून और देश के प्रत्येक नागरिक को लेनी होगी। अन्यथा जंगलराज कायम हो जाएगा और बालिकाएँ असुरक्षित माहौल में रहने को विवश होंगी।
वंदना द्विवेदी एडवोकेट 🙏 प्रदेश अध्यक्ष – केसरिया हिंदू वाहिनी प्रदेश प्रवक्ता – सवर्ण समाज अधिकारी कर्मचारी संगठन, भोपाल मो. 7089040898
