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नई दिल्ली। 10 जुलाई 2026 को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान कृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को इसके महत्व के बारे में बताया था। यह व्रत जाने-अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित और शारीरिक कष्टों से मुक्ति के लिए विशेष रूप से फलदायी है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, योगिनी एकादशी की तिथि 10 जुलाई सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू हुई और 11 जुलाई सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। जिन्होंने 10 जुलाई शुक्रवार को व्रत रखा है, उनका पारण 11 जुलाई शनिवार को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शाम 4 बजकर 36 मिनट तक किया जा सकता है। इस अवधि की कुल अवधि 2 घंटे 46 मिनट है।

वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी या जिन्होंने 11 जुलाई शनिवार को व्रत रखा है, वे 12 जुलाई रविवार को पारण करेंगे। इसका शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 32 मिनट से सुबह 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, जो 2 घंटे 46 मिनट का होगा।पारण के समय सबसे पहले भगवान विष्णु को चढ़ाए गए चरणामृत, तुलसी दल या सात्विक अन्न से व्रत खोलना चाहिए। पारण से पहले ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना या भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है।

योगिनी एकादशी 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार, योगिनी एकादशी तिथि 10 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर प्रारंभ हुई और 11 जुलाई 2026 को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी।

उदयातिथि के आधार पर अधिकांश श्रद्धालुओं ने 10 जुलाई, शुक्रवार को व्रत रखा। वहीं वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले कुछ श्रद्धालु 11 जुलाई, शनिवार को एकादशी व्रत का पालन करेंगे।

11 जुलाई को पारण का शुभ मुहूर्त

जिन श्रद्धालुओं ने 10 जुलाई, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का व्रत रखा है, वे 11 जुलाई, शनिवार को व्रत का पारण करेंगे।

अंत मे यह बता दे कि, योगिनी एकादशी 2026 का व्रत 10 जुलाई को रखा गया है। जिन श्रद्धालुओं ने इसी दिन व्रत रखा, वे 11 जुलाई को निर्धारित शुभ मुहूर्त में पारण करेंगे। वहीं वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले या 11 जुलाई को व्रत रखने वाले श्रद्धालु 12 जुलाई को पारण करेंगे।धार्मिक परंपराओं के अनुसार सही समय पर पारण, भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी दल और चरणामृत से व्रत का समापन तथा दान-पुण्य जैसे कार्य इस पावन अवसर को और अधिक सार्थक बनाते हैं। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा, मान्यताओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत एवं पारण की प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं।

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