नई दिल्ली।जायद सीजन (मार्च से जून) के दौरान किसान तोरई की खेती कर सकते हैं। यह रबी और खरीफ के बीच का समय है, जिसमें नकदी फसलों से अच्छी कमाई संभव है। गर्मी के मौसम को ध्यान में रखकर विकसित ‘काशी रक्षिता’ वैरायटी तोरई की खेती के लिए उपयुक्त बताई गई है।
‘काशी रक्षिता’ एक उन्नत किस्म है, जिसे भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) ने विकसित किया है। यह अधिक पैदावार देने वाली और बीमारियों के प्रति सहनशील है। फसल 50-60 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में नकद आय प्राप्त कर सकते हैं।10 ग्राम ‘काशी रक्षिता’ तोरई के बीज नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) के ऑनलाइन स्टोर पर सिर्फ 60 रुपये में उपलब्ध हैं। किसान घर बैठे इन बीजों का ऑर्डर कर सकते हैं।
खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त है, जिसमें pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेत तैयार करते समय गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करें। बुवाई के बाद समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और मचान का सहारा देना जरूरी है। सही देखभाल से कम लागत में अच्छा उत्पादन और मुनाफा हो सकता है। यह फसल घर की छत या बालकनी पर भी उगाई जा सकती है।
