अमेरिका। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वह क्यूबा को किसी न किसी रूप में हासिल कर लेंगे। उन्होंने कहा, “किसी न किसी रूप में क्यूबा को लूंगा… चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में ले लूं। मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं।”
ट्रम्प ने रविवार को एयर फोर्स वन में भी कहा था कि वह क्यूबा को संभाल रहे हैं और जल्द ही कोई डील करेंगे या जो करना होगा करेंगे। उन्होंने अपनी प्राथमिकता पहले ईरान बताई और उसके बाद क्यूबा का जिक्र किया। ट्रम्प ने क्यूबा को असफल देश करार देते हुए कहा कि वहां न पैसा है, न तेल और कुछ भी नहीं है। उन्होंने क्यूबा की जमीन और मौसम की तारीफ की तथा उसे सुंदर द्वीप बताया।
अमेरिका और क्यूबा के संबंध पिछले 65 साल से खराब चल रहे हैं। 1959 में फिदेल कास्त्रो की क्रांति के बाद क्यूबा ने कम्युनिस्ट नीति अपनाई और अमेरिकी संपत्ति जब्त कर ली। इसके जवाब में अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। दोनों देशों के बीच संबंध इतने तनावपूर्ण रहे कि 55 साल तक कोई अमेरिकी राष्ट्रपति क्यूबा नहीं गया। 2015 में बराक ओबामा ने क्यूबा का दौरा किया था।
ट्रम्प इस साल पहले ही वेनेजुएला और ईरान में सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं। उनके ताजा बयानों को क्यूबा पर संभावित अगले कदम के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका जनवरी से क्यूबा को तेल सप्लाई रोकने का दबाव बना रहा है और दूसरे देशों को भी चेतावनी दी गई है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और संभावित असर
ट्रम्प के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। क्यूबा सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने की संभावना है, जो इस बयान का कड़ा विरोध कर सकती है।
इसके अलावा अन्य देशों और वैश्विक संगठनों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यह मामला केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक राजनीति और स्थिरता से जुड़ा हुआ है।
डोनाल्ड ट्रम्प का क्यूबा को लेकर दिया गया बयान न केवल विवादास्पद है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म देता है।यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्यूबा और अन्य देशों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और यह मुद्दा आगे किस दिशा में बढ़ता है। फिलहाल यह मामला वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक अहम चर्चा का विषय बन गया है।
