शाहजहांपुर: देश के कई हिस्सों में रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं अब पूरी तरह पककर तैयार हो गई है। खेतों में सुनहरी बालियां लहरा रही हैं और किसान कटाई व स्टोरेज की तैयारियों में लगे हुए हैं। कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि अच्छी पैदावार के बाद फसल के सही प्रबंधन और सुरक्षित भंडारण का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, ताकि जानकारी के अभाव में होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
डॉ. हादी हुसैन खान ने गेहूं की कटाई के बारे में बताया कि बालियां पूरी तरह पक जाएं, सुनहरी और सख्त हो जाएं तभी कटाई शुरू करें। कटाई हार्वेस्टर से की जा सकती है। कटाई के बाद बचने वाले फसल अवशेष यानी नरई या पराली को जलाना नहीं चाहिए क्योंकि इससे मिट्टी की उर्वरता को नुकसान होता है। नरई का उचित प्रबंधन कर इसे चारे या खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
स्टोरेज के समय अनाज में नमी की मात्रा 8 से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। अधिक नमी होने पर घुन या फफूंद लगने का खतरा रहता है। भंडारण का स्थान पूरी तरह साफ, सूखा और कीट-मुक्त होना चाहिए। पुराने बर्तनों या कोठियों को नीम के पत्तों या अन्य जैविक तरीकों से उपचारित करना चाहिए।
एक्सपर्ट ने सलाह दी कि किसान फसल कटते ही तुरंत बाजार में न बेचें। अनाज को वैज्ञानिक तरीके से कुछ महीनों तक सुरक्षित भंडारित करें और ऑफ-सीजन में बेचें तो बेहतर दाम मिल सकते हैं। उन्होंने आलू का उदाहरण देते हुए कहा कि तुरंत बेचने पर दाम कम मिलते हैं, लेकिन स्टोरेज के बाद अधिक मुनाफा होता है। यही नियम गेहूं पर भी लागू होता है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है।
