नई दिल्ली।पारंपरिक लाल-नारंगी गाजर की जगह अब किसान पीली गाजर की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इस नई वैरायटी को कम समय और कम लागत में तैयार किया जा सकता है। मंडियों में इसकी अधिक मांग के कारण किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में दोगुना मुनाफा मिल रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस पीली गाजर की खासियत यह है कि यह सेहत के लिए बेहद पौष्टिक है। इसमें विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे बड़े शहरों और मंडियों में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। खेती के नजरिए से यह फसल रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली है, जिससे कीड़े और बीमारियों का खतरा बहुत कम होता है। नतीजतन किसानों को महंगी कीटनाशक दवाओं और केमिकल्स की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे खेती की कुल लागत घट जाती है।
पीली गाजर की सबसे बड़ी खूबी इसका कम समय में तैयार होना है। जबकि आम लाल गाजर को पकने में ज्यादा वक्त लगता है, यह नई वैरायटी बहुत कम दिनों में खुदाई के लिए तैयार हो जाती है। इससे किसान उसी खेत में दूसरी फसल भी आसानी से लगा सकते हैं।मंडियों में नई और अनोखी फसल होने के कारण पीली गाजर के दाम आम गाजर से ज्यादा प्रीमियम मिलते हैं। किसान इसे अपनाकर अपनी आमदनी को कम समय में दोगुना कर रहे हैं।
किसानों के लिए बन रही नया अवसर
देश में बदलते कृषि बाजार और बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के बीच पीली गाजर किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है। कम लागत, कम समय और अधिक मांग के कारण यह फसल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभा सकती है।
कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नई और अधिक लाभकारी फसलों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। पीली गाजर की खेती इसी दिशा में एक सफल उदाहरण बनकर उभर रही है। आने वाले समय में इसकी मांग और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों की आय में और इजाफा हो सकता है।
