नई दिल्ली।गर्मियों के मौसम में खीरा और ककड़ी की खेती को जैकपॉट की संज्ञा दी जा रही है। ये फसलें मात्र 40 दिनों में तैयार हो जाती हैं और कम लागत में अच्छा मुनाफा देती हैं। इन सब्जियों को ज्यादा खाद या कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती और ये तेजी से बढ़ती हैं।खीरे की कई आधुनिक किस्में करीब 40 दिन में फल देना शुरू कर देती हैं। लौकी और तोरई भी गर्मियों में तेजी से बढ़ती हैं और लगातार कई महीनों तक पैदावार देती रहती हैं। इन सब्जियों में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण बाजार में इनकी खपत हमेशा बनी रहती है।
खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। बुवाई से पहले खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए और गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट डालना चाहिए। बीजों को बेड बनाकर लगाने से पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और सिंचाई में आसानी रहती है। गर्मियों में तेज धूप से बचाव के लिए मल्चिंग तकनीक का उपयोग मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद करता है।
अगेती खेती के जरिए फसल को बाजार में पहले पहुंचाकर अच्छे दाम हासिल किए जा सकते हैं। गर्मियों में शादी-ब्याह और जूस की दुकानों पर खीरा-ककड़ी की थोक मांग रहती है। जैविक तरीके से उगाकर सीधी मार्केटिंग करने पर मुनाफा और बढ़ सकता है। यह 40-50 दिनों का छोटा निवेश लाखों का रिटर्न दे सकता है।
