लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जातीय जनगणना की तैयारी जोरों पर है। जनगणना निदेशक और मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि राज्य में यह प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में संचालित की जाएगी।पहले चरण में घरेलू स्तर पर डेटा संग्रह किया जाएगा। इसमें परिवारों की बुनियादी जानकारी और मकानों की लिस्ट तैयार होगी। दूसरे चरण की जनगणना फरवरी 2027 में शुरू होगी, जिसमें व्यक्तिगत डेटा का संग्रह होगा। इसी चरण में लोगों से उनकी जाति की जानकारी ली जाएगी।
शीतल वर्मा ने बताया कि यह जातिगत जनगणना आजादी के बाद पहली बार हो रही है। केंद्र सरकार की नीति के तहत इसे जनगणना का हिस्सा बनाया जा रहा है। अब तक जनगणना में जातियों का विवरण इस रूप में व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया जाता था।प्रक्रिया पूरी तरह केंद्र सरकार की निर्धारित नीतियों के अनुसार चलेगी और व्यक्तिगत डेटा संग्रह के दौरान प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा। हालांकि, अभी इसके लिए एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इस पहल से शासन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा। सटीक और विस्तृत डेटा के आधार पर योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा, जिससे समाज के सभी वर्गों तक लाभ पहुंचाया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में जातिगत जनगणना की यह पहल प्रशासनिक सुधार और सामाजिक समझ के लिहाज से एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस प्रक्रिया को किस तरह लागू किया जाता है और इसके परिणाम राज्य की नीतियों और विकास पर किस प्रकार प्रभाव डालते हैं।
