नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को एक नोटिफिकेशन जारी कर कफ सीरप समेत सभी सीरप वाली दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्ची के बिक्री पर रोक लगा दी है। अब इन दवाओं की खरीद के लिए ग्राहकों को डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होगी।यह बदलाव केंद्र सरकार द्वारा ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में ‘ड्रग्स (पांचवां संशोधन) रूल्स, 2026’ के माध्यम से किया गया है। संशोधन को 9 जून को आधिकारिक गजट में अधिसूचित किया गया था।
यहां यह जानना अति आवश्सयक हैं कि, सरकार ने ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ की अनुसूची K (Schedule K) के सीरियल नंबर 13 के आइटम नंबर (7) से ‘सीरप’ (Syrups) शब्द हटा दिया है। इससे पहले अनुसूची K में शामिल कुछ श्रेणियों की दवाओं को विशेष शर्तों के साथ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के कुछ प्रावधानों से छूट प्राप्त थी। अब सीरप वाली दवाएं सख्त नियामक आवश्यकताओं के दायरे में आ गई हैं।यह संशोधन 29 दिसंबर 2025 को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के बाद किया गया, जिसमें स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं। सरकार ने सभी प्राप्त टिप्पणियों पर विचार करने के बाद फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया। यह कदम ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सलाह के बाद उठाया गया है।
क्या बदला है नियमों में?
सरकार ने अनुसूची K (Schedule K) के सीरियल नंबर 13 के आइटम नंबर (7) से ‘सिरप’ (Syrup) शब्द को हटा दिया है। पहले अनुसूची K के अंतर्गत आने वाली कुछ दवाओं को विशेष परिस्थितियों में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के कुछ प्रावधानों से छूट प्राप्त थी। इसी व्यवस्था के कारण कई प्रकार की कफ सीरप और अन्य सिरप आधारित दवाएं अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हो जाती थीं।
नए संशोधन के बाद सीरप श्रेणी की दवाएं इस छूट के दायरे से बाहर हो गई हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब मेडिकल स्टोर संचालकों को ऐसी दवाएं बेचने के लिए निर्धारित नियामक प्रावधानों का पालन करना होगा और ग्राहकों को डॉक्टर द्वारा जारी वैध पर्ची प्रस्तुत करनी होगी।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
विशेषज्ञों का मानना है कि कई कफ सीरप और अन्य लिक्विड दवाओं का बिना चिकित्सकीय सलाह के उपयोग बढ़ता जा रहा था। कुछ मामलों में इनका दुरुपयोग भी सामने आया। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में देश और विदेश में भारतीय निर्मित कुछ कफ सीरप को लेकर गुणवत्ता संबंधी चिंताएं भी सामने आई थीं।
सरकार का मानना है कि डॉक्टर की निगरानी में दवा उपयोग से मरीजों को सही उपचार मिलेगा और अनावश्यक या गलत दवा सेवन के जोखिम कम होंगे। इससे स्व-दवा (Self Medication) की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लग सकेगा।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया यह संशोधन देश की दवा वितरण व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका प्रभाव मरीजों, मेडिकल स्टोरों, डॉक्टरों और फार्मा उद्योग सभी पर देखने को मिलेगा। सरकार का दावा है कि यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने और दवा उपयोग को अधिक सुरक्षित एवं जिम्मेदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
