जहानाबाद। बिहार के नालंदा, गया और औरंगाबाद जिले मगही पान की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं। मगध क्षेत्र में पान की खेती सदियों से परंपरागत रूप से की जाती रही है। पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए नालंदा जिले के इस्लामपुर प्रखंड में पान अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया है, जहां वैज्ञानिक किसानों को उन्नत खेती, रोग प्रबंधन और बेहतर उत्पादन की जानकारी देते हैं।
जानकारी देते चले कि, वर्तमान में मगही पान की खेती का मौसम चल रहा है। किसान मार्च तक ब्रीजा तैयार कर अप्रैल से पौधरोपण शुरू करते हैं। अधिकांश किसान ब्रीजा पद्धति से खेती करते हैं। जून से अगले तीन महीनों तक रोग और कीटों के प्रकोप की संभावना अधिक रहती है।पान अनुसंधान केंद्र, इस्लामपुर के वरीय वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जिन किसानों ने अप्रैल-मई में रोपाई की है, उन्हें अब सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर उपाय करने से फसल बचाई जा सकती है और अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है।
डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार, किसानों को महीने में कम से कम दो बार छिड़काव करना चाहिए। हर 15 दिन पर 3 मिलीलीटर नीम का तेल प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। नई खेती शुरू करने वाले किसान पान की बेल और रोपण सामग्री का उचित उपचार कर ही लगाएं। इससे पौधे स्वस्थ रहेंगे और उत्पादन बढ़ेगा।
