नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अहम आर्थिक मंत्रालयों के बड़े अधिकारियों से कहा कि सरकार को युवा, गतिशील और भविष्य की सोच रखने वाली होनी चाहिए। यह संदेश उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ जेन जी के विरोध-प्रदर्शनों के बीच इंस्टाग्राम पर अपनी बात रखने के कुछ दिनों बाद दिया। वित्त, वाणिज्य, उद्योग और टेक्नोलॉजी से जुड़े मंत्रालयों के सचिवों तथा अधिकारियों के साथ बैठक के बाद जारी बयान में पीएम ने कहा कि सरकार को हमेशा युवा, गतिशील और भविष्य की सोच रखने वाली होनी चाहिए, जो तेजी और इनोवेशन के साथ नई चुनौतियों और मौकों के हिसाब से खुद को ढालती रहे।
यहांं हम आपको यह बता दें कि, पीएम मोदी ने अहम सेक्टर में युवा उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे इंडस्ट्री से सलाह-मशविरा करके ऐसे कोर्स तैयार करें जिनसे वर्कफोर्स को उभरते हुए सेक्टर में जरूरी स्किल्स मिल सकें। बयान में उल्लेख किया गया कि शिक्षण संस्थान बड़ी संख्या में इंजीनियर, प्रोफेशनल और ग्रेजुएट तैयार कर रहे हैं, लेकिन अक्सर इंडस्ट्री के लिए स्किल गैप एक चुनौती बनकर उभरा है और इंटर्नशिप स्कीम के जरिए सरकार की स्किलिंग पहल का अब तक वैसा असर नहीं हुआ है जैसा होना चाहिए था।
भविष्य की चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में लचीलापन और तेजी समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दुनिया तेजी से बदल रही है और नई तकनीकें, डिजिटल परिवर्तन तथा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां लगातार नए अवसर और नई चुनौतियां लेकर आ रही हैं। ऐसे में सरकारी संस्थानों को भी पारंपरिक कार्यशैली से आगे बढ़ते हुए आधुनिक और परिणाम आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि प्रभावी शासन वही है जो समय की मांग के अनुसार खुद को बदल सके और नागरिकों की अपेक्षाओं को समझते हुए तेजी से निर्णय लेने में सक्षम हो।
अंत मे चलते चलते यह बताते चले कि, गलत जानकारी से निपटने के बारे में भी पीएम ने संदेश दिया। बयान में कहा गया कि पीएम ने उन रणनीतिक सेक्टर में सक्रिय रूप से बातचीत करने की अहमियत पर जोर दिया जहां देश बड़े कदम उठा रहा है, ताकि ऐसी कोशिशों के बारे में गलत जानकारी और बेबुनियाद डर का मुकाबला किया जा सके। उन्होंने हर पॉलिसी और फैसले के केंद्र में नागरिकों को रखने की जरूरत पर जोर दिया। सुधार सिर्फ एक फैशनेबल शब्द नहीं बल्कि असरदार गवर्नेंस के लिए लगातार जरूरी हैं। पीएम ने प्रोसेस में सुधार करने, काम करने के कल्चर को बेहतर बनाने और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया।
