नई दिल्ली।खेती को स्मार्ट और आसान बनाने के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। खेतों में खाद और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने के लिए किसान अब ड्रोन खरीद सकते हैं। भारत सरकार एग्रीकल्चर ड्रोन की खरीद पर बंपर सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिससे इसकी लागत काफी कम हो जाती है।
इस कड़ी में जानकारी दे दें कि, एग्रीकल्चर ड्रोन खरीदने और सब्सिडी पाने के लिए किसानों को कृषि यंत्रीकरण के आधिकारिक पोर्टल agrimachinery.nic.in पर जाना होगा। वहां फार्मर रजिस्ट्रेशन या अपनी कैटेगरी (जैसे FPO या SHG) के अनुसार नया अकाउंट बनाना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद पर्सनल और जमीन से जुड़ी डिटेल्स भरनी होंगी। इसके बाद आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, जमीन के कागजात और DGCA अप्रूव्ड वेंडर से प्राप्त ड्रोन का कोटेशन अपलोड करना होगा। फॉर्म सबमिट करने के बाद जिला कृषि अधिकारी दस्तावेजों की जांच करेंगे। मंजूरी मिलने पर वेंडर से ड्रोन खरीद सकते हैं और बिल अपलोड करने पर सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आ जाएगी।
यहां हम आपको यह बता दें कि, सरकार व्यक्तिगत छोटे, सीमांत, महिला और एससी-एसटी किसानों को ड्रोन की कीमत पर 40 से 50 प्रतिशत (अधिकतम 5 लाख रुपये तक) की सब्सिडी दे रही है, जबकि FPO और किसान सहकारिताओं को 75 प्रतिशत तक छूट मिल सकती है। सब्सिडी केवल DGCA से प्रमाणित ड्रोन मॉडल्स पर ही उपलब्ध है। ड्रोन उड़ाने के लिए रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (RPC) होना भी जरूरी है।
ड्रोन खरीदने के लिए कहां करना होगा आवेदन
सरकार की सब्सिडी योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कृषि यंत्रीकरण के आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके लिए किसानों को सबसे पहले agrimachinery.nic.in वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होता है।
किसानों को यह जाननाआवश्यक हैं कि, पोर्टल पर किसान अपनी श्रेणी के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। व्यक्तिगत किसान, एफपीओ, सहकारी समितियां और स्वयं सहायता समूह अलग-अलग श्रेणियों में आवेदन कर सकते हैं। नया अकाउंट बनाने के बाद आवेदक को अपनी व्यक्तिगत जानकारी और खेती से जुड़ी डिटेल्स भरनी होती हैं।
यह भी बताते चले कि, एग्रीकल्चर ड्रोन की सब्सिडी के लिए आवेदन करते समय किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी और जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।इसके अलावा किसान को DGCA अप्रूव्ड वेंडर यानी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कंपनी से ड्रोन का कोटेशन भी लेना होता है। यह कोटेशन आवेदन के साथ पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी होता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसान मानक और सुरक्षित ड्रोन ही खरीद रहा है।
वही, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एग्रीकल्चर ड्रोन भारतीय खेती का अहम हिस्सा बन सकते हैं। इससे खेती अधिक वैज्ञानिक, तेज और सुरक्षित बनेगी। सरकार की सब्सिडी योजनाओं से छोटे किसानों को भी आधुनिक तकनीक अपनाने का मौका मिल रहा है।
डिजिटल और स्मार्ट खेती की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि किसान सही तरीके से ड्रोन तकनीक का उपयोग करें तो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है। यही वजह है कि कृषि क्षेत्र में ड्रोन टेक्नोलॉजी को भविष्य की खेती के रूप में देखा जा रहा है।
