समाचार मिर्ची

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अमेरिका और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण रिश्तों में एक नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है। 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका ने रूस के ऊर्जा और व्यापार क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका खुद रूस के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहा है। खासकर तब, जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में हुई मुलाकात में इस मुद्दे पर चर्चा हुई।

भारत ने बताया कि 2024 में यूरोपीय यूनियन ने रूस के साथ करीब 85 बिलियन यूरो (₹7.65 लाख करोड़) का व्यापार किया। इसी तरह, अमेरिका खुद अपनी न्यूक्लियर इंडस्ट्री के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल, इंडस्ट्री के लिए पैलेडियम, उर्वरक और केमिकल इंपोर्ट कर रहा है। 2024 में अमेरिका और रूस के बीच कुल व्यापार करीब 43 हजार करोड़ रुपए, जो 2023 की तुलना में 25.8% (1.8 अरब डॉलर या 151 अरब रुपए) कम था। अमेरिका ने रूस को 52.83 करोड़ डॉलर (लगभग 44 अरब रुपए) का माल निर्यात किया। वहीं, अमेरिका ने रूस से 3 अरब डॉलर (लगभग 252 अरब रुपए) का माल आयात किया।

भारत को लेकर अमेरिका की आलोचना और दोहरे मानदंड

अमेरिका बार-बार भारत पर यह आरोप लगाता रहा है कि रूस से तेल खरीदकर वह पुतिन को फायदा पहुंचा रहा है। ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर खुले बाजार में मुनाफे के साथ बेच रहा है।

भारत ने इसका जवाब देते हुए कहा था कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद उसके पारंपरिक तेल आपूर्तिकर्ता यूरोप को सप्लाई करने लगे, जिसके चलते भारत को रूस की ओर रुख करना पड़ा। उस समय अमेरिका ने ही भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए हरी झंडी दी थी।

अमेरिका और रूस के बीच संभावित ऊर्जा सौदे से यह साफ है कि वैश्विक राजनीति में स्थायी दुश्मन या स्थायी दोस्त जैसी कोई स्थिति नहीं होती। परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से नीतियां बदलती रहती हैं।

भारत पर टैरिफ लगाकर आलोचना करने वाला अमेरिका अब खुद रूस के साथ डील की कोशिश कर रहा है। यह न केवल अमेरिकी रणनीति की विडंबना को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता से ज्यादा अहमियत हितों और ऊर्जा सुरक्षा की होती है।आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका वास्तव में रूस पर से कुछ प्रतिबंध हटाएगा और क्या भारत को भी इस बदलते माहौल में कोई राहत मिलेगी।

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