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नई दिल्ली। देश के किसान कम लागत और लंबे समय तक मिलने वाली आय के कारण चीकू की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। एक बार पौधा लगाने के बाद यह कई सालों तक फल देता रहता है। महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी बड़े स्तर पर खेती की जा रही है।

यहां हम आपको यह बता दें कि, चीकू की खेती उपजाऊ मिट्टी में संभव है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत का पीएच मान 5.8 से 8 के बीच होना चाहिए। इसके लिए गर्म और स्वच्छ जलवायु बेहतर है। पौधे 10 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान सहन कर सकते हैं, जबकि 70 प्रतिशत तक नमी वाले मौसम में अच्छा विकास होता है। ज्यादा ठंड वाले क्षेत्रों में इसकी खेती नुकसानदायक हो सकती है।

खेत की तैयारी में पुरानी फसल के अवशेष हटाकर दो-तीन बार गहरी जुताई की जाती है। रोटावेटर से मिट्टी बराबर कर समतल किया जाता है। पौधा लगाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 2 फीट गहरे गड्ढे तैयार किए जाते हैं, जिनमें 5 से 6 मीटर की दूरी रखी जाती है। गड्ढों में गोबर की खाद और उर्वरक मिलाए जाते हैं।

मिट्टी और जलवायु का विशेष महत्व

चीकू की सफल खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु का चयन बेहद जरूरी माना जाता है। हालांकि इसकी खेती विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी को सबसे बेहतर माना जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक खेत की मिट्टी का पीएच मान 5.8 से 8 के बीच होना चाहिए। इससे पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है और पोषक तत्वों का अवशोषण भी आसानी से हो पाता है।

जलवायु की बात करें तो चीकू गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क वातावरण में अच्छा उत्पादन देता है। पौधे 10 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन कर सकते हैं। वहीं लगभग 70 प्रतिशत तक नमी वाले मौसम में पौधों का विकास बेहतर देखा गया है।

बदलते कृषि परिदृश्य में चीकू की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। कम लागत, लंबे समय तक उत्पादन, अपेक्षाकृत आसान प्रबंधन और बाजार में स्थिर मांग इसे विशेष बनाती है।

चलते चलते बता दें कि, यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों से खेती करें, गुणवत्तापूर्ण पौधों का चयन करें और उचित देखभाल पर ध्यान दें, तो चीकू की खेती उनके लिए लंबे समय तक आय का मजबूत स्रोत बन सकती है। यही कारण है कि देशभर में कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ चीकू के बाग लगाने में रुचि दिखा रहे हैं।

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